'आप ही कर दो अंतिम संस्कार...', कुरुक्षेत्र में भाई की मौत पर हाथ जोड़कर बोली इकलौती बहन, अस्थियां लेने से किया इनकार
पिहोवा में सरस्वती तीर्थ पर रह रहे बेघर जुगल किशोर का निधन हो गया। उनकी बहन ने बीमारी का हवाला ...और पढ़ें

जुगल किशोर फाइल फोटो
HighLights
बेघर जुगल किशोर का पिहोवा में निधन हो गया
बहन ने बीमारी का हवाला देकर अंतिम संस्कार से मना किया
बाबा फरीद अनाथ आश्रम ने किया अंतिम संस्कार
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। पिछले 10 सालों से पिहोवा में सरस्वती तीर्थ पर अकेले जीवन गुजार रहे बेघर जुगल किशोर को अंतिम संस्कार पर भी परिवार के किसी सदस्य का सहारा नहीं मिला।
अस्पताल में जुगल किशोर की मौत के बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम संचालक बाबा निशान सिंह के बार-बार कॉल करने के बाद दिल्ली के उत्तम नगर से छोटी बहन पिहोवा तो पहुंची पर अंतिम संस्कार में शामिल होने की असमर्थता जताते हुए हाथ जोड़कर बोली की आप ही अंतिम संस्कार कर दो, वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकती।
वह बहुत बीमार है। यही नहीं जब बाबा निशान सिंह ने उन्हें संस्कार के बाद अस्थियां ले जाने के लिए कहा तो उन्होंने इसके लिए इनकार करते हुए साफ कहा कि वह नहीं आ सकती, अस्थियां भी आप ही विसर्जित कर देना। वह बहुत बीमार रहती हैं, खड़ा होने में असमर्थ है, रुक नहीं सकती।
10 वर्ष से रह रहे थे जुगल किशोर
जानकारी के अनुसार, दिल्ली निवासी जुगल किशोर (71) पिछले 10 साल से सरस्वती तीर्थ में रह रहा था। बाबा निशान सिंह ने बताया कि परिवार के बारे में जुगल किशोर ने केवल एक छोटी बहन पुष्पा के बारे में ही बताया था। इसके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसकी शादी भी नहीं हुई थी।
पिछले दो सप्ताह से उसकी तबीयत खराब हुई तो वे उसे अपने साथ आश्रम ले आए और इलाज कराया। कई दिन तक पिहोवा सरकारी अस्पताल में उसका इलाज करवाया। उसकी बहन से संपर्क करने की कोशिश करने पर बात नहीं हो सकी।
चार सितंबर को हुई जुगल किशोर की मौत
इसके बाद बीमार जुगल किशोर को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके बाद उसकी बहन से संपर्क हुआ तो उन्हें बताया कि जुगल किशोर की तबीयत खराब है, उन्हें आखिरी बार देखने के लिए बुलाया।
इतने में चार सितंबर को जुगल की इलाज के दौरान जुगल किशोर की मौत हो गई। अस्पताल पहुंची उसकी बहन ने भाई का शव अंतिम बार बिस्तर पर देखा और अंतिम संस्कार में शामिल होने पर असमर्थता जताई।
