जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : बरसात के साथ सीजन शुरू होते ही धरतीपुत्र धान रोपाई के लिए खेतों में उतर गए हैं। जिला भर में करीब एक लाख 18 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की जाती है। इसमें से करीब 70 फीसद क्षेत्र में पीआर किस्म और लगभग 30 फीसद में बासमती धान की रोपाई की जाती है।

किसान पिछले कई दिनों से पूरी तैयारी कर 15 जून का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में मंगलवार से धान की रोपाई का काम तेज हो गया है। कृषि विशेषज्ञों ने भी धान की रोपाई के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक का समय ही उपयुक्त बताया है।

कई दिनों से मौसम चल रहा अनुकूल

पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर बूंदाबांदी होने पर मौसम भी धान रोपाई के अनुकूल चल रहा है। बूंदाबांदी होने पर खेतों में नमी आ गई थी। इसी का फायदा उठाते हुए किसानों ने खेतों में अपने ट्रैक्टर उतार दिए थे। कई किसानों ने धान रोपाई से पहले खेत में ढैंचा व मूंग की बिजाई कर रखी थी। ऐसे खेत को धान रोपाई के लिए तैयार करने से पहले तीन-चार दिन तक खुला छोड़ना पड़ता है। अब इन्हीं खेतों में पानी छोड़ते ही किसानों ने इन्हें तैयार कर दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को मिला काम

धान की रोपाई का सीजन शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को भी काम मिल गया है। अब करीब डेढ़ माह तक मजदूरों को धान रोपाई का काम मिल रहेगा। प्रगतिशील किसान महावीर सिंह ने बताया कि मजदूर 2700 से लेकर 3200 रुपये प्रति एकड़ तक धान रोपाई के ले रहे हैं।

पीआर किस्म की रोपाई शुरू

मंगलवार से पीआर किस्म की धान की रोपाई का काम शुरू हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. प्रदीप मील ने बताया कि 15 जून से 15 जूलाई तक धान की रोपाई का सही समय है। 15 जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक किसान पीआर किस्म की धान की रोपाई कर सकते हैं। इसके बाद 15 से 20 जुलाई तक बासमती की रोपाई के लिए सही समय है। उन्होंने बताया कि किसानों में धान की सीधी बिजाई का रुझान भी बढ़ा है। किसान सीधी बिजाई कर पानी की बचत कर रहे हैं।

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