जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग की ओर से स्वर्णप्राशन की महत्ता के विषय में अवगत कराने के लिए एक दिवसीय वेबिनार आयोजित किया गया। इस वेबिनार में लखनऊ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. डीएन मिश्रा मुख्यातिथि रहे। वेबिनार महाविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष डा. शंभू दयाल शर्मा की अध्यक्षता में हुआ।

राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय मुजफ्फरनगर से डा. मिथिलेश वर्मा विशिष्ट अतिथि व कर्नाटक के बेलगावी से डा. अजीज अरबर मुख्य वक्ता रहे। डा. अजीज ने स्वर्णप्राशन विषय में अनुसंधान की वर्तमान प्रवृत्ति विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में स्वर्ण पहले से ही कुछ मात्रा में विद्यमान होता है जिसकी कमी होने पर मानसिक दुर्बलता, पाचन तंत्र व रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है उसे सुदृढ़ करने के लिए स्वर्णप्राशन बहुत जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसकी मात्रा बाल्यावस्था-युवावस्था को ध्यान में रखकर प्रकृति व शारीरिक बल के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की जानी चाहिए। डा. मिथिलेश ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आज के युग में स्वर्ण प्राशन की तुलना स्टेरायड से की गई है जो कि बिल्कुल अनुचित है। इसे बनाने में सिर्फ स्वर्ण, मधु व घृत का ही नहीं बल्कि अन्य मेद्य औषधियों का भी उपयोग किया जाता है। देश-विदेश से 88 विभिन्न आयुर्वेदिक अध्येता, 158 शिक्षक और 99 चिकित्सक प्रतिभागी इस वेबिनार के माध्यम से लाभांवित हुए।

आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डा. देवेंद्र खुराना ने बताया कि 2019 में शुरू की गई स्वर्णप्राशन प्रक्रिया के द्वारा अब तक कुरुक्षेत्र ही नहीं दूरवर्ती जगहों से भी लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। इस दौरान डा. प्रेमचंद मंगल, डा. अमित कटारिया, डा. सचिन शर्मा, मनोज कुमार व प्रवीण राणा मौजूद रहे।

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