फोटो संख्या : 25, 26 - कुवि के संगीत विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय आनलाइन कार्यशाला का समापन जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. संजीव शर्मा ने कहा कि ज्ञान पर चर्चा और मंथन से नए रास्ते निकलेंगे। इस पवित्र कार्य से कला-कौशल एवं व्यावसायिक प्रतिभा को नई ऊंचाइयां प्रदान करने में सहयोग मिलेगा। वह वीरवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग की ओर से आयोजित आनलाइन कार्यशाला के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संगीत एक अद्भुत एवं पवित्र कला है। मानव के जन्म के साथ ही संगीत का जन्म होता है। उसका जीवन संगीत के इर्द-गिर्द घूमता है और संगीत के साथ नाचते गाते हुए वह अपनी खुशी को प्रकट करता है। संगीत के बिना मानव जीवन का सही मायने में कोई अर्थ ही नहीं है। कुवि का संगीत एवं नृत्य विभाग संगीत विषय के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रमों, गोष्ठियों व कार्यशालाओं के माध्यम से सकारात्मक प्रयास करता रहता है। यह संगीत कार्यशाला भी इसी श्रृंखला की एक अति महत्त्वपूर्ण कड़ी है। प्रदर्शन कला में व्यवसायिक रूप से सफल होने के लिए कौशल विकास में निरंतरता होनी आवश्यक है और उसके लिए ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को हर पल नया कुछ करने की प्रेरणा मिलती है।

संगीत एक पवित्र कला : प्रो. मंजूला

कुवि की डीन अकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि संगीत एक पवित्र कला है इसमें शास्त्र के साथ साथ प्रायोगिक पक्ष भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस कार्यशाला में तबला नवाज डा. विजयशंकर मिश्र व गायक और हारमोनियम विशेषज्ञ डा. दिनकर शर्मा ने अपने-अपने विचार रखे। कार्यशाला के अंत में प्रो. शुचिस्मिता शर्मा ने कार्यशाला से जुड़े सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार जताया। इस कार्यशाला से विभाग की अध्यक्ष डा. आरती श्योकंद भी शामिल रही।

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