जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : गांव अमीन के 80 वर्षीय निवासी देसराज चौहान का कहना है कि हमारे समय में साइकिल पर चुनाव प्रचार होता था। उस समय एक आध जीप होती थी। जीप के पीछे धूल खाते दौड़ने का आनंद अब नहीं रहा। गांव में जाने पर लस्सी, गुढ़-चना घरों से मिलता था। चाय का तो प्रचलन ही नहीं था। खेतों में कभी-कभी गन्ना की पेराई होते रहने पर वहीं प्रचार की चौपाल लग जाता था। किसान गन्ना का रस पिलाकर स्वागत करते थे। पहले बूथ पर ग्राम सेवक और चौकीदार निष्पक्ष चुनाव करवा लेते थे। कोई भय नहीं लगता था। कोई बोगस वोट नहीं डालता था। 1985 से 95 के बीच स्थिति ज्यादा खराब हुई और बोगस वोट डालने की प्रवृति बढ़ी। अब फिर से स्थिति सामान्य हुआ है, लेकिन खर्चा भी खूब होने लगा है।

Posted By: Jagran

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