जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर स्थानीय और प्रदेश के ही शिक्षाविद को बनाने की मांग उठी है। लोगों का मानना है कि स्थानीय शिक्षाविद् संस्कृति और धरातल को अच्छी तरह से समझ सकता है और युवाओं के हित में फैसले भी लिए जा सकेंगे। विदित है कि केसी शर्मा का 31 मार्च को कार्यकाल पूरा होने के बाद डा. नीता खन्ना को कार्यकारी वाइस चांसलर बनाया गया है। स्थायी नियुक्ति के लिए 10 जुलाई आवेदन की अंतिम तारीख है।

प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक अरोड़ा ने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि चार महीने से कुवि में स्थायी कुलपति नहीं है और कुलसचिव भी कार्यवाहक बनाया गया है। इसके अलावा डीएन ऑफ कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से खाली है। ऐसे में विश्वविद्यालय का कार्य सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा। विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला संस्कृति विश्वविद्यालय है। यहीं से प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय बनें हैं। आज कुवि 99वें रैंक पर है। यह गंभीर चिता का विषय है। कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़े हुए हैं और पेंशनर्स को भी समय पर पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा। उनको ऐसे में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

अपनों को दी जाएं प्रमुखता

अशोक अरोड़ा ने कहा कि कुलपति की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। सरकार दूसरे प्रदेशों से कुलपति लगाने में माहिर है। विश्वविद्यालय का कुलपति प्रदेश के निवासी किसी योग्य प्रख्यात शिक्षाविद को ही लगाया जाएं। उन्होंने कुवि के मेस कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का नोटिस देने की कड़ी निदा की है।

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी करेगी फैसला

कुवि के नए वाइस चांसलर के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की गई है। इसमें दो सदस्यों की नियुक्त एग्जीक्यूटिव कमेटी और एक सदस्य राज्यपाल की ओर से नियुक्ति की गई है। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 10 जुलाई तक आवेदन मांगे हैं। इसके बाद सर्च कमेटी वीसी तय करेगी।

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