जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र:

कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली के डायरेक्टर च्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि मंगलवार 12 नवंबर भरणी नक्षत्र, मेष राशि के चंद्रमा सहित काíतक माह की पूर्णमासी है। इस पूíणमा का विशेष महत्व है क्योंकि श्री गुरुनानक देव की जयंती भी है। इस कारण ये दिन सिख धर्म के लोगों के लिए बहुत विशेष महत्वपूर्ण है। प्राचीनकाल में इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था।

पंचांग के अनुसार काíतक माह की पूíणमा को काíतक पूíणमा कहा जाता है। इसे त्रिपुरारी पूíणमा और देव दीपावली भी कहते हैं। प्राचीन समय में इस तिथि पर शिवजी ने त्रिपुरासुर नाम के दैत्य का वध किया था, इस कारण इसे त्रिपुरारी पूíणमा कहते हैं। इसके अलावा मान्यता है कि काíतक पूíणमा पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार भी लिया था। इस तिथि के संबंध में एक अन्य मान्यता ये भी है कि इस दिन देवता की दीपावली होती है। इसे देव दीपावली भी कहते हैं। इस दिन काíतक मास के स्नान समाप्त हो जाएंगे। काíतक पूíणमा पर पवित्र नदी में स्नान, दीपदान, पूजा, आरती, हवन और दान का बहुत महत्व है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप