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जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत प्ले स्कूलों को संचालन के लिए आंगनबाड़ी वर्करों के दूसरा बैच के प्रशिक्षण का बुधवार को तीसरा दिन रहा। झांसा रोड स्थित जनता पब्लिक स्कूल में प्रशिक्षण में थानेसर खंड की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) कुसुम कांबोज मुख्य रूप से उपस्थित रही।

मास्टर ट्रेनर एवं आंगनबाड़ी सुपरवाइजर पूजा ने आंगनबाड़ी वर्करों को सामाजिक विकास, भावात्मक विकास और रचनात्मक विकास विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे अपने परिवार व समुदाय में रहकर अच्छे से सीखते है। परिवार, समुदाय का हिस्सा होता है। एक अच्छा समुदाय व समाज, बच्चों के सीखने और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। एक बेहतर समाज व समुदाय का निर्माण अच्छे नागरिकों से होता है। इसलिए आंगनबाड़ी में सभी बच्चों के साथ समानता का व्यवहार करें। वहीं भावनात्मक विकास में आनंद, प्रेम, क्रोध, डर आश्चर्य, दुख व विश्वास वे संवेदनाएं है, जो परिस्थतियों के अनुसार महसूस होती है। कभी-कभी बच्चे अपनी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति नकारात्मक ढंग से करते है जैसे गुस्सा आने पर चीजों को फेंकना, तोड़ना व जोर-जोर से चिल्लाना। इसलिए सभी बच्चों के साथ सभी वर्कर भावनात्मकता से जुड़े। जिससे बच्चे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करने के साथ-साथ सही ढंग से उसकी अभिव्यक्ति कर पाएं।

बच्चों में रचनात्मक विकास भी जरूरी

मास्टर ट्रेनर पूजा ने बताया कि बच्चों में रचनात्मक विकास का होना बहुत जरूरी है। तीन से पांच आयु वर्ग के बच्चे कल्पनाशील होते हैं। वह चीजों की कल्पना अपने अनुभव व पूर्व ज्ञान के आधार पर आसानी से कर पाते है। उनकी इस कल्पनाशीलता का विकास रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से किया जा सकता है। आंगनबाड़ी में बच्चों को विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्य करने के पर्याप्त मौके प्रदान करने से वे नई-नई चीजों का निर्माण करना सीख सकते है। जिस पर विशेष ध्यान दिया जाए।

Edited By: Jagran