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करवाचौथ पर बादल या कोहरे के कारण न दिखे चांद, तब इन 5 पारंपरिक तरीकों से पूरा करें व्रत

Published: Thu, 29 Oct 2026 01:23 PM (IST)

करवा चौथ पर बादलों के कारण चांद न दिखने की आशंका के बीच, डॉ. रामराज कौशिक ने पारंपरिक उपाय सुझाए हैं।

चांद न दिखे तो कैसे पूरा करें व्रत (जागरण फोटो)

चांद न दिखे तो कैसे पूरा करें व्रत (जागरण फोटो)

HighLights

  1. चंद्रोदय के निर्धारित समय का रखें ध्यान।

  2. भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण करें।

  3. 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का जाप कर पूजा करें।

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। आसमान में बादल छाए हों या बारिश चांद के दीदार में बाधा बने, लेकिन करवा चौथ पर सुहागिनों की आस्था नहीं डिगेगी।

पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ महिलाएं गुरुवार को करवाचौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजा कर उन्हें चंद्रोदय का इंतजार रहता है। हालांकि मौसम में बदलाव की संभावना के बीच चंद्रमा के दर्शन को लेकर महिलाओं की चिंता बढ़ सकती है।

ब्रह्मसरोवर स्थित गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डा. रामराज कौशिक ने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवाचौथ का व्रत रखा जाता है।

इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनके दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

ऐसे में यदि बादलों या बारिश के कारण चंद्रमा दिखाई न दे, तो स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के समय का ध्यान रखते हुए चंद्रदेव का स्मरण और पूजा की जा सकती है।

बादल छाए बरसात आएं हों तो क्या करें?

डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार कुरुक्षेत्र, थानेसर और अंबाला में रात 8:13 बजे चंद्रोदय का अनुमान है। वहीं चंडीगढ़ में रात 8:14 बजे और दिल्ली-एनसीआर में रात 8:17 बजे चंद्रमा के उदय होने की संभावना है।गुरुग्राम में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:18 बजे बताया गया है।

ये करें चंद्रमा न दिखाई दे तो

1.चंद्रोदय के निर्धारित समय का रखें ध्यान: आसमान में बादल होने पर भी अपने शहर के पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय जान लें। कई बार बादलों के बीच से चंद्रमा थोड़ी देर के लिए दिखाई दे सकता है।
2. भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का करें स्मरण: यदि चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन संभव न हों, तो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान बालचंद्र का ध्यान कर सकते हैं। श्रद्धापूर्वक चंद्रदेव से प्रार्थना करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
3. चंद्रदेव का मंत्र जाप करें: पूजा के दौरान ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है। चंद्रदेव का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें और अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार पूजा संपन्न करें।
4. चंद्रमा की प्रतीकात्मक पूजा: कुछ परंपराओं में चंद्रमा की आकृति चावलों से बनाकर या चंद्रदेव के चित्र के सामने पूजा करने का विकल्प अपनाया जाता है।
5. यदि लगातार बादल या बारिश के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो व्रत खोलने के समय को लेकर अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय विद्वान या पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा।