जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में रविवार को ब्रह्मासरोवर के घाटों पर जन सैलाब उमड़ा। दिन भर शिल्प और सरस मेला देखने के लिए सुबह से ही भीड़ ने ब्रह्मासरोवर की ओर रुख करना शुरू कर दिया था। ब्रह्मासरोवर के साथ लगती सड़कों पर भी जाम की स्थिति बनी रही। यह महोत्सव जनमानस के लिए एक अनूठे संगम के रूप में परिवर्तित हो गया है, जिसने हर आयुवर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। लाखों की संख्या में महोत्सव में पहुंची भीड़ ने जमकर खरीदारी की। शिल्पकार और सरस में पहुंचे स्टाल संचालक भी गदगद हो गए।

इस महोत्सव में संस्कृति और संस्कार हैं तो यहां अध्यात्म भी है। यहां गीत-संगीत है तो लोगों के लिए घरेलू व साज-सज्जा तथा वस्त्रों की भी भरमार है। मनोरंजन के लिए मेला भी लगा है तो धर्मलाभ के लिए रोजाना महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। धर्मनगरी को महोत्सव के आयोजन के लिए विश्व स्तर पर अलग पहचान मिल रही है। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटकों तथा कलाकारों से सुसज्जित महोत्सव एक लघु भारत की छठा बिखेर रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये कलाकार अपने-अपने राज्य की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वहीं शिल्पकार सरस व क्राफ्ट मेले में अपने प्रदेशों की सभ्यता व वेशभूषा आदि का प्रचार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह संगम उत्सुकता का विषय बना हुआ है। महोत्सव स्थल पर जगह-जगह बीन तथा नगाड़े बज रहे हैं, जहां से गुजरने वाले युवक-युवतियां कलाकारों के साथ थिरकने को विवश हो उठते हैं। इससे सरस व क्राफ्ट मेले में स्टॉल लगाने वाले शिल्पकारों का भी भरपूर मनोरंजन हो रहा है।

Posted By: Jagran

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