धान की कटाई में न करें जल्दबाजी! पकी फसल ही लाएं मंडी, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की किसानों को सलाह
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को जल्दबाजी में धान न काटने की सलाह दी है। उन्होंने ...और पढ़ें

कृषि मंत्री ने बताया क्यों अटकती है धान की खरीद।
HighLights
जल्दबाजी में धान काटने से बचें किसान, पकी फसल लाएं
अधिक नमी वाली धान से खरीद में समस्या आती है
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर 'सेवा संकल्प अभियान' चलेगा
जागरण संवाददाता कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को जल्दबाजी में धान काटने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मंडी में केवल अच्छी तरह पकी हुई फसल लाएं ताकि उसकी खरीद जल्द हो सके।
अधिक नमी वाली फसल नहीं लानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में भाजपा के 'गीता कमल' कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पहले किसान धान हाथ से काटता था। कटाई के बाद फसल को खेत में सूखने का समय मिलता था।
अब कंबाइन से कटाई होने के कारण फसल जल्दी कट जाती है। एक ही खेत का धान कहीं सूखा होता है और कहीं उसमें नमी ज्यादा होती है। अगर 10-12 दिन भी फसल को और पकने दिया जाए तो उसका नुकसान नहीं होगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसान को उसकी फसल का पूरा दाम मिलना चाहिए। सरकार की तरफ से खरीद व्यवस्था में किसान को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। समस्या तब पैदा होती है जब ज्यादा नमी वाली धान मंडी में पहुंचती है।
धान की आगे मिलिंग होती है और उससे चावल तैयार किया जाता है, इसलिए क्वालिटी और नमी का ध्यान रखना जरूरी है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पिहोवा में आयोजित किसान महापंचायत में किसानों ने 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की थी। साथ ही नमी सीमा को 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग भी की थी।
कृषि मंत्री राणा ने कहा कि गेहूं की कटाई और खरीद के बाद सीधा सरकारी गोदाम में चला जाता है, जबकि धान को राइस मिल में भेजना पड़ता है। मिलिंग के बाद चावल तैयार होता है और केंद्र सरकार के लिए भी चावल लिया जाता है। राइस मिलर इस व्यवस्था का हिस्सा हैं और सरकार के साथ मिलकर पूरा सिस्टम चलता है।
इस मौके पर उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भाजपा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाएगी। अभियान को बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा।
इसके लिए प्रदेश से लेकर जिला, विधानसभा, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अभियान में स्कूली बच्चों को भी जोड़ा जाएगा। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में मेरे सपनों का भारत विषय पर कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
2047 के भारत को लेकर बच्चों के विचारों को सामने लाने के लिए स्कूल स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी।
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