जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : समय सुबह 11 बजे, स्थान बिजली निगम कार्यालय। कार्यालय में लोग भटक रहे हैं। जिसे भी पूछो, वही बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायत लेकर पहुंचा हुआ है। लोगों का कहना है कि जब से पूर्व सैनिकों को बिजली निगम ने हटाया है तब से बिलों में गड़बड़ी हो रही है। न तो समय पर बिल ही मिलता है और न ही सही रीडिग आती है। पहले जो हजार-दो हजार के बिल आते थे वे अब कई-कई हजार के आ रहे हैं। बिजली मीटरों में खराबी है। शिकायत लेकर कार्यालय के पहुंचते तो अधिकारी नहीं मिलते। ऐसे में सिवाय भटकने के उनके पास कोई चारा नहीं है।

रीडिग दिखा है शून्य बिल आया 12 हजार का

विधाता कांप्लेक्स के दुकानदार सतीश कुमार का कहना था कि बिना रीडिग के बिजली बिल भेजा जा रहा है। न्यू रीडिग में शून्य यूनिट दर्शायी गई हैं, जबकि बिल 12 हजार रुपये का आया है। उनका कहना है कि कई बार निगम के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, मगर उनकी शिकायत का समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में चक्कर लगाने के उनके पास कोई चारा नहीं है।

कमरा नंबर छह व नौ में नहीं मिले अधिकारी

ग्राउंड फ्लोर पर कमरा नंबर छह व नौ पर कोई भी अधिकारी नहीं बैठते। यहां पर मौजूद लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन कमरों में जिन अधिकारियों की ड्यूटी है वे कभी मिलते ही नहीं हैं। कई बार तो सुबह से शाम हो जाती है, मगर अधिकारी आते नहीं हैं। ऐसे में थक हार कर वापस लौटना पड़ता है, जबकि फाइल में जब तक इनके हस्ताक्षर नहीं होते तब तक काम नहीं हो पता। उनका कहना था कि निगम के अधिकारियों को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए।

शिकायत तो ले लेते हैं, मगर निपटती नहीं

सहायक डेस्क पर शिकायत दे रहे लोगों का कहना था कि शिकायत दर्ज कर ली जाती है, मगर उन्हें समय पर निपटाया नहीं जाता। कई-कई बार शिकायत पर कार्रवाई के बारे में पूछने के लिए आना पड़ता है, तब जा कर शिकायत पर कार्रवाई होती है।

कमरों में बिखरी दिखी फाइलें

निगम कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरे में फाइलें बिखरी दिखाई दी। जब इन फाइलों के बारे में पूछा गया कि क्या यह कबाड़ है तो एक कर्मचारी ने बताया कि नहीं इन सभी में रिकार्ड है। जब कंप्यूटर पर रिकार्ड नहीं मिलता तो इन्हीं फाइलों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे फेंकने के बारे में उनका कहना था कि यह तो संबंधित कर्मी को संभालनी चाहिए।

पूरी रीडिग का आ रहा है बिल

बिजली निगम के उपमंडल अधिकारी रणबीर देसवाल का कहना था है कि अब पूरी रीडिग का बिल आ रहा है, इसलिए उपभोक्ता परेशान हैं। पहले गलत रीडिग ली जाती थी, मगर अब डिजिटल तरीके से रीडिग ली जा रही है, सही रीडिग के अनुसार ही बिल बन रहे हैं।

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