रवि कुमार बाबैन : हमारे प्रदेश में खेती करने वाले परिवारों में रवायती खेती का रुझान ज्यादा है, लेकिन कुछ किसान ऐसे भी है जो समय के साथ बदल रहे है। खेती के व्यवसाय को और भी लाभदायक व्यवसाय बनाकर अन्य किसानों में अपनी अलग पहचान बना रहे है। यह कहानी भी एक ऐसे किसान की है जिसने रवायती खेती के साथ-साथ कुछ अलग करने के बारे में सोचा और अपनी मेहनत व लगन से अपनी एक अलग पहचान बनाई।

बाबैन खंड के गांव सुजरा के किसान रतन सिंह अपने 14 एकड़ में रवायती खेती करते थे। रतन सिंह का भी खेती की तरफ ही रुझान था, लेकिन एक दिन गुड़ बनाने का विचार मन में आया तो उसने अपने खेतों में गुड़ बनाने की चरखी लगा दी। अब लोगों को आर्गेनिक गुड़ बनाकर स्वाद चखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे विशेष प्रकार का गुड़ बनाते है। जिसमें हल्दी, सौंफ, मेथी, अजवाइन व असूठ का मिश्रण होता है। जिसके खाने से घुटनों, कमर व बदन दर्द ठीक हो जाता है। उन्होंने बताया कि वे 20 किलो से अधिक गुड आर्डर पर तैयार करते हैं। गन्ने के सीजन में लोगों की गुड की डिमांड पूरी नहीं होती। पूरा सीजन ताजा बनता है।

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