जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : नगर परिषद का अतिक्रमण पर शनिवार को लगातार चौथे कार्रवाई हुई। पुरानी सब्जी मंडी में करीब 29 साल पुराना कब्जा हटाया गया। इसके साथ कई दबे विवाद निकल आए। फड़ी लगाने वालों का आरोप है कि नप उनसे इसका किराया लेता है और 31 मार्च तक का किराया लिया हुआ है। उन्होंने एसडीएम अश्विनी मलिक को इसकी रसीद भी दिखाई। करीब छह साल पहले बनाई दो दुकानों को भी कब्जे की बताकर हटाने की आवाज उठी। लोग इसको भी हटाने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन अधिकारी एक पावरफुल फोन को सुनने के कुछ देर बाद ही वापस चले गए। नप ने इसके अलावा छोटा बाजार, शास्त्री मार्केट से महाराणा प्रताप चौक और अग्रसेन चौक से सेक्टर-13 कांग्रेस भवन तक अतिक्रमण हटाया। डीसी धीरेंद्र खड़गटा ने शुक्रवार देर शाम को मेन बाजार का खुद भी मौका देखा था।

एसडीएम अश्विनी मलिक की अगुवाई में नप अधिकारियों ने शनिवार सुबह नौ बजे पुराना बाजार में कार्रवाई शुरू की। पुरानी सब्जी मंडी में फड़ी लगाने वालों को एक घंटे का समय दिया। लोगों ने चेतावनी मिलते ही शेड हटाने शुरू कर दिए। अग्रवाल धर्मशाला की दुकानों के आगे भी 10-12 फुट तक कब्जा कर सब्जी के लिए फड़ी लगाई जाती थी। धर्मशाला की प्रबंधन समिति ने बैठक कर प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया। एसडीएम नप की टीम को लेकर 11:30 बजे फिर पहुंचे। अधिकारियों ने जेसीबी के साथ शैड तोड़ने शुरू कर दिए। यह कार्रवाई करीब एक बजे तक चली। लोग बोले मंडी में पैदल भी नहीं निकल पाते थे

सब्जी मंडी में दोनों तरफ अतिक्रमण किया हुआ था। करीब 50 फुट चौड़ी सड़क पर पैदल निकलने की भी जगह नहीं थी। एक तरह से शहर का इमरजेंसी रोड पूरी तरह से बंद रहती थी। मोती चौक पर रोज जाम रहता है। सुबह-शाम स्थिति और भी बिगड़ जाती है। यहां पर वर्षों से फड़ी वालों का कब्जा था। मोती चौक जाम होने के बाद बाजार में इमरजेंसी सेवाएं भी नहीं पहुंच सकती। अब रास्ता खुल गया है। सिद्धार्थ नगर के सुरेंद्र ने बताया कि मंडी में जाम की खतरनाक स्थिति रहती थी। अब राहत की सांस मिली है। नप फड़ी वालों से लेता है किराया

फड़ी लगाने वालों का आरोप है नप उनसे किराया लेता है। करीब आठ लोगों ने किराये की रसीद दिखाई। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उससे 31 मार्च तक 1389 रुपये किराया लिया हुआ है। इसके बाद 557 रुपये और किराया लिया। उन्होंने एसडीएम अश्विनी मलिक के सामने अपनी बात रखी, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं की। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों ने एक प्रभावशाली व्यक्ति की दो दुकानों पर कार्रवाई नहीं की। उनको प्रभाव के चलते छोड़ दिया। एक दुकान को करीब 30 हजार रुपये मासिक किराये पर दिया गया है। वहीं फड़ी लगाने वालों से 900 से तीन हजार रुपये किराया लिया जाता है। चेतावनी मिलते ही खुद उतरवाए शेड, सीढि़यां भी तुड़वाई

धड़ाधड़ अतिक्रमण पर हो रही कार्रवाई का असर बाजार में साफ दिखाई दिया। थानेसर नगर परिषद की एक चेतावनी के बाद शास्त्री मार्केट से महाराणा प्रताप चौक तक दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने से शेड उतार दिए। दुकानों के बाहर रखे सामान को भी हटा लिया। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें तक बंद कर दीं। आंबेडकर चौक से रेलवे फाटक की तरफ तीन दुकानों के बाहर शेड पर ही शटर लगा रखा था। इससे आगे जेनरेटर लगा रखा था। अधिकारियों ने जांची रजिस्ट्रियां

मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर कई दुकानदार अड़ गए। उन्होंने कहा कि उनके पास रजिस्ट्री है। उन्होंने अपनी जगह पर दुकान बनाई हुई है। अधिकारियों ने तुरंत रजिस्ट्री उपलब्ध कराने की बात कही। दुकानदारों ने रजिस्ट्री दिखाी तो अधिकारी उनकी बात को सही बताते हुए आगे अतिक्रमण हटाने की बात कहकर निकल गए। ---------------

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस