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'सीजन का खिलौना बना दिया है, काम करना हुआ मुश्किल...', कुरुक्षेत्र में धान खरीद पर आढ़तियों का फूटा गुस्सा

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:32 PM (IST)

इस्माईलाबाद में आढ़तियों ने धान खरीद व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई है, उनका कहना है कि सरकारी एजेंसियां बारदाना ...और पढ़ें

इस्माईलाबाद में धान खरीद पर आढ़तियों का फूटा गुस्सा, बोले- सीजन का खिलौना बना दिया।

इस्माईलाबाद में धान खरीद पर आढ़तियों का फूटा गुस्सा, बोले- सीजन का खिलौना बना दिया।

HighLights

  1. सरकारी एजेंसियों से बारदाने की कमी, धान खरीद प्रभावित

  2. भरे हुए धान का उठान नहीं, आढ़ती-किसान परेशान

  3. मिलरों की स्थिति स्पष्ट नहीं, सरकार से उचित प्रबंध की मांग

संवाद सहयोगी, इस्माईलाबाद। अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन की बुधवार को हुई बैठक में आढ़तियों की धान को लेकर टीस खुलकर सामने आई। आढ़तियों ने कहा कि सीजन का खिलौना बनाकर रख दिया है। ऐसे में काम करना ही मुश्किल हो गया है। आढ़तियों ने मांग रखी कि समय रहते सरकार व्यवस्था की ओर ध्यान दे।

बैठक में एसोसिएशन के प्रधान विनोद कंसल टोनी ने खुलकर कहा कि अभी तक किसानों को आढ़ती अपने स्तर पर खाली बारदाना उपलब्ध करवा रहे थे, जिससे पांच लाख कट्टों में धान भरा जा चुका है।

अब सरकारी एजेंसियां बारदाना उपलब्ध नहीं करवा रही हैं। ना किसी अधिकारी की नियमित खरीद के लिए ड्यूटी है और ना ही बारदाना उपलब्ध करवाया जा रहा है। अभी तक भरे धान का उठान तक नहीं किया जा रहा है।

राइस मिलरों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सीजन कैसे चलेगा। उन्होंने कहा कि आढ़ती सरकार के साथ हैं, लेकिन सरकार धान खरीद व उठान के उचित प्रबंध करे। इस मौके पर आढ़तियों ने कहा कि अब धान सुखाई व भराई के प्रबंध करना भी आसान नहीं रह गया है। खरीद के आदेश आए, मगर वास्तव में खरीद के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

भरी धान कौन उठाएगा

आढ़तियों को चिंता सता रही है कि अब तक कट्टों में भरी धान कौन उठाएगा। पहले इस धान को सुखाया गया। इसके बाद तुलाई कर कट्टों में भरा गया। कट्टों को चट्टों में लगाया गया। इस सारे काम की मजदूरी का बोझ किसानों पर पड़ा है। अब कहा जा रहा है कि इस धान की दोबारा ढेरी लगाकर बिकवाली होगी।

ऐसे में बेतुका खर्च कौन वहन करेगा। वहीं अभी तक राइस मिलर भी उठान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सीजन की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है, जिससे आढ़ती और किसान दोनों इस समय परेशान हैं।

अधिकारी खरीदें और लाएं

व्यापारी बताते हैं कि मिलर इस बात पर अडिग हैं कि खरीद एजेंसियों के अधिकारी धान की खरीद करें और राइस मिल में ले आएं। ऐसी धान लाएं, जिसकी नमी 17 प्रतिशत से अधिक ना हो।

यहीं से असमंजस पैदा हो गया है कि इससे अधिक नमी वाले धान को कहां लेकर जाएं। मिलर तर्क देने के बाद चुप्पी साधे हुए हैं। इसके लिए सरकार और प्रशासन को हल निकालना होगा।