कुरुक्षेत्र के 60 स्कूलों में शुरू होगा कैप्सूल प्रोग्राम, हर महीने परखी जाएगी बच्चों की सीखने की क्षमता
कुरुक्षेत्र में निपुण हरियाणा मिशन के तहत 60 सरकारी स्कूलों में 'कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम' शुरू किया जा रहा है।

कुरुक्षेत्र के 60 स्कूलों में शुरू होगा कैप्सूल प्रोग्राम (जागरण फोटो)
HighLights
60 सरकारी स्कूलों में 'कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम' शुरू।
बच्चों की सीखने की क्षमता का मासिक मूल्यांकन होगा।
व्यक्तिगत शैक्षणिक सहायता और अतिरिक्त अभ्यास सामग्री मिलेगी।
फोटो संख्या : 2 व 3
- 60 स्कूलों में होगी शुरुआत, विषयवार कमजोरी पहचानकर मिलेगा व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :
अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता का आंकलन केवल वार्षिक परीक्षा के आधार पर नहीं होगा। निपुण हरियाणा मिशन के तहत जिले में कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के लर्निंग लेवल की हर महीने समीक्षा की जाएगी। जिला एफएलएन कोर्डिनेटर महावीर आत्रेय ने बताया कि जिले में 482 राजकीय प्राथमिक स्कूल है जिनमें से 60 स्कूलों में इस कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम को शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेंसस-2:2 के अनुसार जो स्कूल सी कैटेगरी में आए थे, उन्हीं स्कूलों को इस कैटेगरी में रखा गया है। पिहोवा व थानेसर के ब्लाक ये स्कूल लिए गए हैं।
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बच्चे की पढ़ने व लिखने की दक्षता को मजबूत करना लक्ष्य
कोर्डिनेटर महावीर आत्रेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की पढ़ने, लिखने और गणितीय दक्षता को मजबूत करना है। योजना के पहले चरण में जिले के उन स्कूलों को विशेष रूप से बी और सी श्रेणी में चुना गया है, जहां केवल 40 से 60 प्रतिशत विद्यार्थी ही निपुण स्तर तक पहुंच पाए हैं।
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हर महीने किया जाता है मूल्यांकन
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रत्येक महीने विद्यार्थियों का विषयवार मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किस बच्चे को भाषा, गणित या अन्य विषयों में किस प्रकार की कठिनाई है। इसके बाद संबंधित छात्र को व्यक्तिगत अकादमिक सहयोग और अतिरिक्त अभ्यास सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
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ग्रेड-2 के विद्यार्थियों पर रहेगा विशेष फोकस
कार्यक्रम में ग्रेड-2 के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस रहेगा, क्योंकि इसी स्तर पर बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान विकसित किया जाता है। शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि कमजोर विद्यार्थियों की सीखने की गति में सुधार हो सके। मासिक मूल्यांकन से बच्चों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और वार्षिक परीक्षा तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय रहते कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी। विभाग ने सभी चयनित विद्यालयों को कार्यक्रम के प्रभावी संचालन और नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
- 60 स्कूलों में होगी शुरुआत, विषयवार कमजोरी पहचानकर मिलेगा व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :
अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता का आंकलन केवल वार्षिक परीक्षा के आधार पर नहीं होगा। निपुण हरियाणा मिशन के तहत जिले में कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के लर्निंग लेवल की हर महीने समीक्षा की जाएगी। जिला एफएलएन कोर्डिनेटर महावीर आत्रेय ने बताया कि जिले में 482 राजकीय प्राथमिक स्कूल है जिनमें से 60 स्कूलों में इस कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम को शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेंसस-2:2 के अनुसार जो स्कूल सी कैटेगरी में आए थे, उन्हीं स्कूलों को इस कैटेगरी में रखा गया है। पिहोवा व थानेसर के ब्लाक ये स्कूल लिए गए हैं।
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बच्चे की पढ़ने व लिखने की दक्षता को मजबूत करना लक्ष्य
कोर्डिनेटर महावीर आत्रेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की पढ़ने, लिखने और गणितीय दक्षता को मजबूत करना है। योजना के पहले चरण में जिले के उन स्कूलों को विशेष रूप से बी और सी श्रेणी में चुना गया है, जहां केवल 40 से 60 प्रतिशत विद्यार्थी ही निपुण स्तर तक पहुंच पाए हैं।
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हर महीने किया जाता है मूल्यांकन
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रत्येक महीने विद्यार्थियों का विषयवार मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किस बच्चे को भाषा, गणित या अन्य विषयों में किस प्रकार की कठिनाई है। इसके बाद संबंधित छात्र को व्यक्तिगत अकादमिक सहयोग और अतिरिक्त अभ्यास सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
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ग्रेड-2 के विद्यार्थियों पर रहेगा विशेष फोकस
कार्यक्रम में ग्रेड-2 के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस रहेगा, क्योंकि इसी स्तर पर बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान विकसित किया जाता है। शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि कमजोर विद्यार्थियों की सीखने की गति में सुधार हो सके। मासिक मूल्यांकन से बच्चों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और वार्षिक परीक्षा तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय रहते कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी। विभाग ने सभी चयनित विद्यालयों को कार्यक्रम के प्रभावी संचालन और नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
