जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति की ओर से सेक्टर-सात के कम्युनिटी सेंटर में आयोजित श्रीमछ्वागवत कथा में कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्रीकृष्ण रुकमणी विवाह प्रसंग विस्तार से सुनाया। इस मौके पर श्री कृष्ण-रुक्मीणि की झांकी दिखाई गई। कार्यक्रम में रतिया के विधायक डॉ. रविद्र सिंह बलियाला, नगर परिषद थानेसर की अध्यक्षा उमा सुधा, रमेश सुधा, अमीर चंद, पार्षद मोहन लाल अरोड़ा, पूर्व पार्षद कुसुम राणा, जगतार सिंह काजल, करण सिंह राणा, जरनैल सिंह एवं गुरपाल सिंह ने भागवत पूजा की। प्रवचनों में अनिल शास्त्री ने कहा कि धर्म पुराणों में आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख मिलता है, जिनमें ब्रह्म विवाह सर्वश्रेष्ठ है। ब्रह्म विवाह द्वारा जो संतान उत्पन्न होती है, वही संतान पितरों को गति प्रदान करने वाली होती है। उन्होंने बताया कि जो लड़का-लड़की अपने माता पिता की इच्छा के विरुद्ध मनमाना विवाह करते हैं, वह उनके पितरों को अधोगति प्रदान करता है और संतान में भी वर्णसंकर आता है। इसलिए माता-पिता की इच्छा से, गुरुजन, ब्राह्मण एवं अग्नि को साक्षी मानकर विवाह करना चाहिए। यही ब्रह्म विवाह कहलाता है। भागवत आरती में सुदर्शन सिधवानी, अशोक गर्ग, हरि सिंह राणा, अश्वनी राणा, राम सिंह, शेरपाल राणा, डॉ. अजय सुनेजा आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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