संवाद सहयोगी, शाहाबाद : भारतीय किसान यूनियन ने हरियाणा के कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सब्जियों के संरक्षित मूल्य में वृद्धि किए जाने की मांग की है। भाकियू के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने बताया कि पत्र के माध्यम से कहा गया है कि किसानों को आर्थिक संकट से उभारने व मंडियों में फलों व सब्जियों की कम कीमत के दौरान कृषि विविधिकरण में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए हरियाणा सरकार ने भावांतर योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष चार सब्जियों आलू चार रुपये किलो, टमाटर पांच रुपये किलो, प्याज चार रुपये किलो, फूलगोभी का संरक्षित मूल्य पांच रुपये किलो रखा गया था, जोकि इस वर्ष भी लागू है। लेकिन बढ़ रहे डीजल, लगवाई के खर्चो को देखें तो उत्पादों पर संरक्षित मूल्य कम है, जबकि किसान की लागत ज्यादा आ रही है। आलू के प्रति एकड़ पर किसान का खर्चा लगभग 66 हजार 580 व इससे ज्यादा आ रहा है। कुल उत्पादन 100 ¨क्वटल पर प्रति ¨क्वटल 666 रुपये खर्च होते हैं, जबकि आलू पर संरक्षित मूल्य 400 रुपये प्रति ¨क्वटल मिल रहा है। इससे तरह किसानों को 266 रुपये प्रति ¨क्वटल नुकसान हो रहा है। यदि किसानों को मार्च के बाद इन सब्जियों को शीत ग्रह में रखना हो तो किसानों को 120 से 130 रुपये तक प्रति 50 किलो की थैली पर किराया देना होता है। जिससे कि 260 रुपये प्रति ¨क्वटल अतिरिक्त खर्च होगा, जिससे किसान की लागत करीब 926 रुपये प्रति ¨क्वटल हो जाएगा। जिससे यह योजना किसान के हित में नहीं है, इसी कारण किसान इस योजना का लाभ नहीं ले रहे या लाभ लेने वालों की संख्या बहुत कम है। इसलिए इसी वर्ष से संरक्षित मूल्यों में वृद्धि की जानी अति आवश्यक है। प्रवक्ता ने कहा कि योजना को 25 नवंबर से शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के काफी किसान 25 नवंबर से गेहूं की फसल की बिजाई के लिए आलू को कच्चा खदेड़ना शुरू कर देते हैं, जबकि यह योजना फरवरी से शुरू होती है।जिस कारण किसानों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिलता।

Posted By: Jagran