जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : हरियाणा राज्य का पांडुलिपि संसाधन व संरक्षण केंद्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू केंद्रीय पुस्तकालय के ऊपरी तल पर पंडित स्थाणुदत्त नाम से संचालित है। संस्कृत विभाग के निदेशक डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि केंद्र में 12 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने किया था।

प्रो. मिश्र ने कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान-विज्ञान जो लगभग डेढ़ करोड़ पांडुलिपियों ग्रंथों से भरा पड़ा है। उन्हें आधुनिक ज्ञान की मुख्य धारा में लाकर लोकहित व राष्ट्र हितैषी कार्य योजनाओं में शामिल करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने पांडुलिपियों को पढ़ने व समझने के लिए अनेक वर्षों से पांडुलिपि संसाधन केंद्र प्रत्येक राज्य में स्थापित कर उस राज्य के देवालयों व विद्वान घरानों के घरों से इकट्ठे करके उन पांडुलिपियों की जीर्णता का वैज्ञानिक विधि से सुधार कर संरक्षित कर सूचीबद्ध करके उनका अध्ययन करवाया जा रहा है।

कार्यशाला में शारदा लिपि और ब्राह्मालिपि के प्रशिक्षण कश्मीर के डॉ. शशि शेखर तोशखानी, जम्मू विश्वविद्यालय की डॉ. सुषमा देवी गुप्ता तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली से डॉ. कीर्ति कांत शर्मा आदि प्रसिद्ध लिपि वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसमें कई राज्यों से प्रतिभागी भाग लेकर उक्त लिपियों को वैज्ञानिक विधि से सीख रहे हैं। जम्मू से विवेक खजूरिया तथा कश्मीर से नीलम ने भी शारदा लिपि का प्रतिभागियों को अभ्यास करवाया।

कार्यशाला में शैक्षिक सहयोग मिलेनियम इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन दे रहा है। प्रायोजक राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार हैं। अनेक स्थानीय संस्थान भी शामिल हैं। इसमें कार्यशाला में प्रसिद्ध विद्वान डॉ. संगीता वेदालंकार, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, डॉ. एसके बाजपेयी लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रो. एमरेट्स डॉ. अरूणेश्वर झा भाग ले रहे हैं। केंद्र में प्रतिदिन साढ़े 11 बजे से सांय 5 बजे तक प्रशिक्षण कक्षाएं लगाई जाती हैं।

Posted By: Jagran

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