संवाद सहयोगी, लाडवा : उपमंडल के गांव धनौरा जाटान में मंगलवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने लगभग साढ़े 11 एकड़ पंचायती जमीन को कब्जा मुक्त कराया और जमीन के चारों तरफ लोहे की कांटेदार तारे लगाकर कब्जा ग्राम पंचायत के सरपंच बाबू राम को सौंप दिया। यह पूरी कार्रवाई जिला उपायुक्त के दिशा-निर्देशों पर की गई। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए लाडवा के नायब तहसीलदार आत्म प्रकाश को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए डीएसपी रमेश गुलिया के नेतृत्व में थाना लाडवा प्रभारी सुरेंद्र ¨सह, थाना सदर प्रभारी रामपाल व थाना बाबैन प्रभारी दलीप ¨सह सहित आरएएफ सहित महिला पुलिस कर्मियों सहित लगभग 150 जवान मौके पर मौजूद रहे। बाक्स

गांव के पांच लोगों का था जमीन पर कब्जा गांव धनौरा जाटान के सरपंच बाबू राम ने बताया कि ग्राम पंचायत की लगभग साढ़े 11 एकड़ जमीन पर जितेंद्र ¨सह, ब्रह्मदत्त, वरुण, अमन व ओमप्रकाश का लंबे समय से अवैध कब्जा किया हुआ था। जमीन छुड़वाने के लिए ग्राम पंचायत ने न्यायालय में कब्जा धारकों पर 14 केस किए हुए थे। सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी की अदालत ने 23 जुलाई 2018 को जमीन से कब्जा धारियों को बेदखल कर दिया था। कोर्ट ने 30 अगस्त, 2018 को ग्राम पंचायत की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के आदेश पारित किए और प्रशासन को जमीन से कब्जाधारकों को निकालकर जमीन ग्राम पंचायत को सौंपने के आदेश दिए थे। सरपंच बाबू राम ने बताया कि कब्जा की गई पंचायती जमीन में से 6 एकड़ जमीन में सरकार द्वारा खेल स्टेडियम बनाया जाना है जिसे मंजूरी मिल चुकी है। बाक्स

एक कब्जाधारक ने बाकि कब्जाधारकों से ले रखी थी लीज पर जमीन गांव धनौरा जाटान में जिस जमीन से प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराया है उस जमीन पर लगभग पांच लोगों का कब्जा था, लेकिन उस जमीन को एक कब्जाधारक ने लीज पर लिया हुआ था और वह ही खेती करता था। सरपंच बाबू राम ने बताया कि यह कब्जाधारक जितेंद्र ¨सह बाकि कब्जाधारकों को जमीन के ठेके की बाजार भाव के हिसाब से ठेका राशि देता था। इस समय जमीन में धान की फसल खड़ी है, जो पककर तैयार होने वाली है। बाक्स

कब्जा दिलवाने गई पुलिस की बस धसी, घंटों बाद टैक्ट्रर की मदद से निकाली गांव धनौरा जाटान में पंचायती जमीन से कब्जा छ़ुड़वाने गई पुलिस फोर्स की बस सड़क से नीचे उतारते हुए धंस गई। बस को निकालने का पहले तो पुलिस कर्मियों द्वारा पूरा प्रयास किया गया, लेकिन घंटे भर की मेहनत के बाद भी पुलिस बस को नहीं निकाल पाई। आखिर में बस को निकालने के लिए गांव धनौरा से एक किसान का ट्रैक्टर मंगाया गया, जिसकी मदद से बस को निकाला गया। पुलिस दिलाने तो कब्जा गई थी, लेकिन अपनी ही बस को निकालने में उलझी रही। गनीमत यह रही की कब्जा धारियों द्वारा शांति बनाई रखी और शांति पूर्वक कब्जा हटाया गया। बाक्स

एसी की हवा खाते रहे अधिकारी एक तरफ पुलिस कर्मी अपनी फंसी बस को निकालने में पसीना बहाते नजर आए। वहीं दूसरी तरफ मौके पर स्टार्ट खड़ी डीएसपी की सरकारी एसी गाड़ी चर्चा का विषय बनी रही। इस गाड़ी में डीएसपी रमेश गुलिया सहित ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार बैठे रहे और एसी की हवा खाते रहे। यही नहीं गाड़ी के काले शीशे से पता नहीं चल पा रहा था की गाड़ी में कौन-कौन बैठे। मौके पर नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट से इस संबंध में जानकारी लेने चाही तो वे मौके पर नहीं मिले। बाद में पता चला की ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार आत्म प्रकाश व डीएसपी रमेश गुलिया की काले शीशे वाली सरकारी गाड़ी में बैठकर एसी की हवा खा रहे हैं।

Posted By: Jagran