कुरुक्षेत्र में खोदाई के दौरान मिला 150 साल पुराना ढांचा, ग्रामीणों ने माना गोगा जी का चमत्कार; दर्शन करने पहुंच रहे लोग
कुरुक्षेत्र के नलवी गांव में खुदाई के दौरान 12 फुट नीचे एक पुराना ढांचा मिला है, जिसे ग्रामीण गोगामेड़ी मान ...और पढ़ें

कुरुक्षेत्र में खुदाई के दौरान ढांचा मिलने के बाद ग्रामीणों ने शुरू किया गोगामेड़ी का निर्माण। फोटो जागरण
HighLights
नलवी गांव में 12 फुट नीचे मिला प्राचीन ढांचा।
ग्रामीणों ने इसे गोगामेड़ी मानकर निर्माण शुरू किया।
ढांचा करीब 150 साल पुराना होने का अनुमान।
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। गांव नलवी के खेतों में खोदाई के दौरान करीब 12 फुट की गहराई में एक पुराना ढांचा मिला है। खोदाई में नीचे चूने की चिनाई में ढांचा मिलने पर ग्रामीणों ने इसे गोगामेड़ी बताया है। इसमें करीब एक फुट चौड़ी और 3 फुट लंबी संरचना दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों ने इसे गोगाजी का चमत्कार मानकर गोगामेड़ी का निर्माण भी शुरू कर दिया। इसके लिए ग्रामीण राजस्थान के बागड़ से गोगाजी धाम से दो ईंट निशान के रूप में लेकर आए और इनके साथ निर्माण कार्य शुरू कर दिया। यह पुराना ढांचा एयरफोर्स से सेवानिवृत तारा सिंह के खेतों में मिला है।
ग्रामीण तारा सिंह का परिवार करीब 30 साल से इस जमीन पर खेती कर रहा है। उनके खेत निचाई में हैं और हर वर्ष बाढ़ उनकी फसल को प्रभावित करती है। खोदाई में मिले ढांचे की चारों दीवारों पर खांचे बने हुए हैं। यह छोटी ईंटों से बना है।
ग्रामीण इसकी बनावट को देखकर ग्रामीण इसे करीब 150 साल पुराना बता रहे हैं। ग्रामीण मनजीत ने बताया कि गांव के बुजुर्ग अक्सर इस बात की चर्चा करते थे कि यहां एक पुरानी गोगामेड़ी दबी हुई है। उन्हें इस बात का नहीं पता कि उसकी सही जगह कौन सी है।
दर्शन करने पहुंचे दूर-दराज के लोग
जमीन बाढ़ प्रभावित होने के कारण किसी ने यहां खोदाई करने की कोशिश भी नहीं की। अब तारा सिंह के खेत में पीपल के पेड़ के पास खोदाई हुई तो नीचे पुराना निर्माण निकल आया। इससे गांव में सालों से चली आ रही बात को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई। देखते-देखते ही आसपास से लेकर दूर-दराज के लोग भी यहां दर्शन करने पहुंचने लगे।
74 वर्षीय तारा सिंह ने बताया कि गांव के लोग अक्सर उनके खेत में गोगामेड़ी होने की बात कहते थे। उन्हें इस पर विश्वास नहीं था। इसके बावजूद पीपल के पेड़ के पास उन्होंने कुछ जमीन खाली छोड़ रखी थी और वहां फसल की बिजाई नहीं करते थे।
परिवार ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर नलवी में जमीन खरीदी थी। हालांकि किसी विभाग या अधिकारी ने इसके 150 साल पुराना होने की पुष्टि नहीं की है।
