जागरण संवाददाता, करनाल : नगर निगम में लोगों को नए वाटर कनेक्शन के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अक्टूबर 2018 से मर्ज होने के बाद से अभी तक नगर निगम व्यवस्था बनाने में फेल साबित हो रहा है। एक तरफ जहां बिल कलेक्शन का सॉफ्टवेयर अभी विकसित नहीं हुआ है वहीं, नए वाटर कनेक्शन भी नहीं मिल रहे हैं। लोग पिछले 8 माह से फ्री पानी पी रहे हैं। यही नहीं अगर किसी उपभोक्ता को वाटर बिल अपने नाम से करवाना है तो वो भी रुका हुआ है। निगम में बैठक कर्मचारी आठ माह से हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और निगम के आलाधिकारी फैसला नहीं ले पा रहे हैं।

कर्ज उठा कर दी बच्चों की फीस

हरियाणा गर्वनमेंट पीडब्लयूडी मैकेनिकल वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान कृष्ण शमर ने कहा कि नगर निगम अभी तक मुलाजिमों का वेतन बनाने में फेल साबित हो रहा है। कर्मचारियों को बच्चों के स्कूल में दाखिला करवाने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा है। नगर निगम अभी तक न तो पोस्ट सेंशन नहीं करवा पाया है। पोस्ट न होने के कारण डेढ़ माह से कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं। इस महंगाई में बिना वेतन गुजारा करने में मुश्किल हो रहा है। लगभग 162 मुलाजिमों की अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली है। अधिकारियों से बैठक भी आश्वासन तक सीमित रही है।

नहीं बंटे वाटर-सीवर बिल

सिटी को स्मार्ट बनाने का जिम्मा उठाने वाले नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही इतनी है कि अभी तक शहर में वाटर-सीवर बिल नहीं बांटे गए हैं। जानकारी के अनुसार जून 2018 में जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने बिल बांटे थे। उसके बाद से अभी तक सॉफ्टवेयर डेवेल्प न होने के कारण उपभोक्ताओं को बिल नहीं बंट सके हैं। दिसंबर 2018 तक के बिल पुराने रेट के अनुसार आने है जबकि जनवरी के बाद से तीन गुणा बिल बढ़कर उपभोक्ताओं को मिल सकते हैं। दयानंद कालोनी निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि नीलोखेड़ी और घरौंडा के लोग बढ़े वाटर बिल का विरोध कर चुके हैं, लेकिन करनाल में जानबूझ कर अधिकारी पानी-सीवर बिल बढ़ोतरी को स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। सीवर सफाई समस्या बनी परेशानी

सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए विभाग को निगम में मर्ज किया था, लेकिन शहरवासियों को उलझनों का सामना करना पड़ रहा है। माडल टाउन निवासी सुमित कुमार ने बताया कि मोहल्ले में काफी दिन से सीवर जाम हुआ था। जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय में शिकायत देने गए तो वहां मालूम पड़ा कि नगर निगम में जाना पड़ेगा। जब नगर निगम पहुंचे तो यहां भी सहीं जवाब नहीं मिला। मोहल्ले में गंदगी के कारण कोई हल नहीं मिला तो मजबूरन प्राइवेट मजदूर बुलाकर सीवर की सफाई करवानी पड़ी। सरकार के अनुसार परेशानियों को कम किया गया है, लेकिन यहां तो 8 माह से परेशानियां बढ़ गई हैं। ---वर्जन---

एक्सईएन सत्यप्रकाश जोशी ने बताया कि पानी-सीवर के बढ़े हुए बिल के चार्ज अभी लागू नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा, लोगों की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। वेतन को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है।

Posted By: Jagran

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