पवन शर्मा, करनाल

यकीनन, जब हालात बेहद नाजुक मोड़ पर हों तो एक-एक कदम बहुत सोच-समझकर उठाना पड़ता है। रविवार को जिले के कैमला गांव में आयोजित किसान महापंचायत के दौरान यही हकीकत हर तरफ नजर आई। पुलिस प्रशासन से लेकर कार्यक्रम आयोजित करने वाले नेताओं तक बखूबी समझ रहे थे कि स्थिति बेहद संवेदनशील है। लिहाजा, पूरे हौसले और संयम के साथ उन्होंने वक्त का इंतजार किया और उग्र भीड़ द्वारा हेलीपेड से लेकर मंच तक की गई तोड़फोड़ के बावजूद किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं होने दी। इसी का नतीजा रहा कि लगातार बेकाबू होते हालात के बावजूद आखिरकार स्थिति बहुत हद तक नियंत्रित कर ली गई।

दिल्ली बॉर्डर पर लगातार कायम किसान आंदोलन की हलचल के बीच जिले की घरौंडा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कैमला में किसान महापंचायत के आयोजन पर हर किसी की निगाहें टिकी थीं। इसका सबसे बड़ा कारण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल का बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करना था। हालांकि खराब मौसम खराब के बीच उनका हेलीकॉप्टर कार्यक्रम स्थल के पास बने हेलीपेड पर लैंड नहीं कर सका, जिसके चलते सीएम तो कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए लेकिन अन्य तमाम अन्य प्रमुख नेता जरूर शामिल हुए। इनमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर और पूर्व मंत्री कृष्ण पंवार सहित कई विधायक तथा पूर्व विधायक भी शामिल रहे। सभी ने किसानों सहित समस्त वर्गों के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से उठाए जा रहे बहुआयामी कदमों का प्रमुखता से उल्लेख किया तो विकास का संकल्प भी दोहराया। इधर, महापंचायत के मंच से कुछ ही दूरी पर कड़ी सुरक्षा के बावजूद खेतों के रास्ते पहुंची उग्र भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बावजूद मंचासीन अतिथियों ने ग्रामीणों को कृषि कानूनों के दूरगामी लाभ गिनाए तो कैमला सहित आसपास से आए ग्रामीणों ने भी इसे लेकर उत्साह प्रदर्शित किया।

इधर, मंच पर संबोधन श्रृंखला जारी थी तो दूसरी ओर पास स्थित खेतों के रास्ते हेलीपेड की तरफ बढ़ रही भीड़ के तेवर और अधिक उग्र होते चले जा रहे थे। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन ने हालात की नजाकत समझते हुए देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बावजूद भीड़ आगे बढ़ती रही तो कार्यक्रम संयोजक व विधायक हरविद्र कल्याण और भाजपा के जिला प्रधान योगेंद्र राणा ने समझबूझ से काम लेते हुए वरिष्ठ नेताओं को मंच के समीप स्थित प्राचीन मंदिर की ओर ले जाकर हालात संभाले। इधर, पहले हेलीपेड और फिर मंच पर पहुंची भीड़ लगातार तोड़फोड़ करती रही लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से पूरे संयम से काम लेते हुए किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी गई। आखिरकार कुछ देर बाद उग्र भीड़ के बीच से ही कुछ लोगों ने बेहद नाजुक हो चले हालात को देखते हुए सबको समझाबुझाकर शांत किया तो पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें शांत करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। तब जाकर स्थिति नियंत्रित हो सकी।

हर मोर्चे पर चुनौतियों का अंबार

महापंचायत के दौरान पुलिस प्रशासन के समक्ष मानो चुनौतियों का पहाड़ ही खड़ा हो गया। एक तरफ महापंचायत में शरीक हो रहे वीआइपीज की सुरक्षा का जिम्मा तो दूसरी तरफ घरौंडा व अन्य दिशाओं से कार्यक्रम स्थल पर अलग अलग रास्तों से पहुंच रही उग्र भीड़ पर काबू पाने की चुनौती। इस दौरान चुनौती से पार पाने में आला अधिकारियों को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यही नहीं, उग्र भीड़ का सामना करने को तैयार कैमला के ग्रामीणों को भी समझाने-बुझाने में पुलिस प्रशासन ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया, तब जाकर स्थिति सामान्य हो सकी।

Edited By: Jagran