संवाद सहयोगी, निसिग : कुचपुरा गांव के किसान नफे सिंह की धान के खेत में बने राख के टीले को इंटरनेट मीडिया पर लोग कुदरत का करिश्मा करार दे रहे थे तो वहीं कुछ लोग इसे चमत्कार कह रहे थे। वायरल वीडियो देखने के बाद हर किसी के जहन में कई सवाल उठ रहे थे। क्योंकि इससे पहले क्षेत्र में इस प्रकार की कोई घटना नहीं देखी गई थी।

सोमवार को एक बार फिर दैनिक जागरण की टीम मौके पर पहुंची और घटना से जुड़े तथ्यों का जायजा लिया। इस दौरान घटना के पीछे का सच उजागर किया गया। चमत्कार के नाम पर जो भ्रांतियां फैलाई जा रही थीं, उनसे पर्दा उठाया गया। आसपास के लोगों से इस बारे में पूछताछ की गई, जिसमें लोगों ने इसे चमत्कार की बजाय सामान्य घटना बताया। क्षेत्रवासी किसान केहर सिंह, चरणसिंह, संदीप कुमार का कहना था कि खेत में कोई चमत्कार नहीं हुआ। चमत्कार के नाम पर अफवाह फैलाई गई।

क्षेत्रवासियों ने कहा कि दरअसल किसान ने अपने खेत से 8-10 फुट गहराई तक मिट्टी की खोदाई करवाई थी और शेलर से निकलने वाली धान छिलके की राख डाल दी। ट्रेक्टर की मदद से दो फुट उपजाई मिट्टी की लेयर डाल दी गई। खेत में धान की रोपाई की गई। खेतों में बारिश का अधिक पानी जमा हो गया। सैलर की राख में चला गया। पानी नीचे जाने से हल्की राख ऊपर उठ गई। इसी ने टीले का रूप ले लिया। कुछ ही देर में खेत का पानी सूख गया और धान के खेत में दरारें पडऩे के साथ उबड़ खाबड़ बन गया। घटना 13 जुलाई की है। इस बीच हालांकि किसान नफे सिंह ने जेसीबी की मदद से खेत को समतल करवाने का प्रयास किया, लेकिन फिलहाल खेत अधिक गीला होने के कारण काम बीच में ही रोकना पड़ा।

Edited By: Jagran