संवाद सूत्र, निसिग : एक ओंकार ठाठ आश्रम नानकसर गुरुद्वारा में संत रामसिंह की आत्मिक शांति के लिए पाठों का भोग डाला। क्षेत्र और दूरदराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने संत को श्रद्धांजलि दी। संत महापुरुषों ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान अंगीठा साहिब के स्थान को फूलों से सुसज्जित किया था। मंच के पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेकने वाली संगत का तांता लगा रहा। संगत ने लंबी कतारों में खड़े रहकर माथा टेका। कार्यक्रम को लेकर संगत सेवादारों और पुलिस प्रशासन भारी संख्या में मौजूद रहा। जो वाहनों सहित अन्य व्यवस्था में सहयोग कर रहे थे।

एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि नानकसर वालों को फक्र होना चाहिए, जिन्होंने ऐसी शिक्षा पाई है। ये संत का संगत के साथ अपार स्नेह है। कांग्रेस नेत्री सैलजा ने कहा कि संत की लिखी चिट्ठी के प्रत्येक शब्द में दर्द था। इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि संत के साथ चौटाला परिवार के करीबी संबंध रहे हैं। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अध्यक्ष बलजीत सिंह दादुवाल ने कहा किे संत खुद दुख सह सकते हैं, लेकिन किसीे दूसरे का दुख सहन नहीं कर सकते। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों की दुर्दशा दूर होनी चाहिए। संतों ने दस्तारबंदी कर संत त्रिलोचन सिंह को सौंपी सेवा

कार्यक्रम में मौजूद संतों ने संत रामसिंह को अपने-अपने शब्दों में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने संत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए विचारों के माध्यम से संगत के प्रति उनके प्रेम को व्यक्त किया। उनकी अच्छाई का विस्तृत बखान किया गया। इस दौरान पाठ किया गया और अंतिम अरदास की गई। बाद में संत त्रिलोचन सिंह की संतों ने दस्तारबंदी के रूप में आश्रम की जिम्मेदारी सौंपी। जो कौम के प्रचार- प्रसार और गुरु की सेवा सहित अन्य सभी कार्य करेगा। संगत करेगी हरी-के-पतन के लिए रवानगीे

संत रामसिंह की अस्थियों को हरी-के-पतन में प्रवाहित करने के लिए संतों का एक जत्था शनिवार को नानकसर सिघड़ा से रवानगी करेगा। उनके साथ सैकड़ों की संख्या में संगत के रवानगी करने का अनुमान है। जो शनिवार को बडे नानकसर जगराव में रात्रि विश्राम करेंगे। रविवार को संत रामसिंह की अस्थियों को सतलुज व व्यास नहीं के संगम पर तरनतारन के पास हरी-के-पतन में प्रवाहित किया जाएगा। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर संत बाबा कश्मीर सिंह, संत बाबा घाला सिंह जगराव, बाबा गुरमीत सिंह, संत बाबा बलविद्र सिंह, संत जगमोहन सिंह, संत राजिद्र सिंह इसराना, संत कर्मजीत सिंह इसराना, संत जोगा सिंह, संत अमरजीत सिंह, गुरचरण सिंह, सुखासिंह, संत गुरचरण सिंह, संत लक्खा सिंह, संत गुरदेव सिंह और संत हरजिद्र सिंह मौजूद रहे।

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