संवाद सहयोगी, घरौंडा : राजकीय महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों ने बसताड़ा गांव में फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के तहत एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक किया और किसानों को फानों में आग न लगाने की शपथ भी दिलवाई। स्वयंसेवकों ने किसानों को फानों में आग लगाने से होने वाले नुकसान से भी परिचित करवाया। शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालय घरौंडा के एनएसएस विग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुरेश शर्मा स्वयं सेवकों के साथ बसताड़ा गांव में पहुंचे। हाल ही में काटी गई धान के अवशेषों को न जलाने के प्रति किसानों को जागरूक किया। सुरेश शर्मा ने फानों में आग लगने से होने वाली हानि से अवगत करवाते हुए कहा कि फसल अवशेषों में कीटनाशकों के अवशेष होने के कारण इसको जलाने से विषैला रसायन डायआवसिन हवा में घुल जाता है। फसल की कटाई के समय एवं कटाई के पश्चात अवशेषों को जलाने से हवा में विषैले डायआवसिन की मात्रा 33-270 गुना बढ़ जाती है। डायआवसिन का प्रभाव वातावरण में दीर्घ समय तक रहता है, जो मनुष्य एवं पशुओं की त्वचा पर जमा हो जाता है, और उससे खतरनाक बीमारियां होती हैं। उन्होंने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाकर नष्ट करने की प्रक्रिया से वातावरण दूषित होता है। जमीन का कटाव बढ़ता है एवं सांस की बीमारियां बढ़ती हैं। फसल अवशेषों को जमीन में सीधे ही समावेश करने की प्रक्रिया सरल है, परंतु इसमें कुछ कठिनाइयां भी हैं। जैसे दो फसलों के बीच का अंतर कम होना। इसमें अतिरिक्त कम सिचाई एवं अन्य क्रियाएं भी सम्मिलित होती हैं, जिससे जलती पराली, बढ़ता प्रदूषण लागत बढ़ जाती है। इसलिए फानों में आग न लगाए, ताकि हमारे साथ दूसरों का जीवन भी सुरक्षित रहे।

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