संवाद सूत्र, कुंजपुरा : पिता द्वारा आर्वधन नहर में फेंके गए तीन बच्चों को प्रशासन सात दिन में भी तलाश नहीं कर पाया। आखिरकार आठवें दिन एक बच्चे का शव गांव सिरसी के पास खुद ही पानी पर उतराता हुआ पहले से ही नहर पर डटे स्वजनों को दिखाई दिया तो उन्होंने दो किलोमीटर तक उसका पीछा किया, जिसके बाद सिरसी के ही राहुल नामक युवक ने उसे बाहर निकाल लिया। शव की पहचान करीब आठ वर्षीय शिव के तौर पर हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंच शव को कल्पना चावला राजकीय अस्पताल के मोर्चरी हाउस में रखवाया, जहां बुधवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। वहीं एनडीआरएफ व गोताखोरों की टीम बुधवार को भी बच्चों की सोनीपत व रोहतक तक तलाश करती रही, लेकिन बच्चों का पता नहीं चल पाया। अचानक दिखाई दिया शव : अमित

बच्चों के चाचा अमित कुमार ने बताया कि वे बच्चों के मिलने की उम्मीद में नहर पर थे। देर शाम उन्हें अचानक ही गांव सिरसी पुल के पास शव तैरता दिखाई दिया। गौर से देखा तो वह शव तीनों बच्चों में से एक का लगा और तत्काल गांव सिरसी के ही नहरों से शव निकालने में माहिर रहे राहुल को बुलाया गया। तब तक शव दो किलोमीटर तक आगे जा चुका था और वह तथा अन्य स्वजन उसके पीछे चलते रहे। रेलवे लाइन पुल के समीप शव को राहुल ने बाहर निकाला तो यह शिव का मिला। अब उन्हें उम्मीद है कि देव व जाह्नवी के शव भी आसपास ही मिल जाएंगे। प्रशासन भी अब इसी क्षेत्र में शवों की फिर तलाश कराने पर विचार करने लगा है। विधायक ने परिवार को दिया मुख्यमंत्री का संदेश, 50 हजार की आर्थिक सहायता सौंपी

उधर बच्चों की तलाश न हो पाने का मामला आखिरकार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक पहुंच गया है। सीएम ने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। विधायक हरविद्र कल्याण चंडीगढ़ जाकर सीएम को मामले की विस्तृत जानकारी देने के साथ परिवार के हालात से भी अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर घरौंडा विधायक हरविद्र कल्याण मंगलवार को गांव नलीपार में पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे तो बच्चों के करीब 75 वर्षीय बुजुर्ग दादा चरण सिंह व मां बेबी ने फफक-फफककर उन्हें व्यथा सुनाई। सांत्वना देते हुए विधायक ने बताया कि वह इस मामले को लेकर दो बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। अब चंडीगढ़ जाकर मुख्यमंत्री से मिलकर मामले की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करने के लिए पूरा आश्वासन दिया है। उन्होंने पीड़ित दादा चरण सिंह को निजी तौर पर 50 हजार रुपए आर्थिक सहायता स्वरूप भेंट किए तो मौके पर ही पीएमकेवीवाई की टीम को बुला कर आदेश दिया कि बच्चों की मां बेबी को संस्था द्वारा संचालित ट्रेनिग सेंटर में तत्काल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि परिवार के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट दूर हो सके। विधायक ने मंगलवार को उपायुक्त निशांत यादव व एसपी गंगाराम पूनिया के साथ बैठक भी की। बच्चों को खोजने के तमाम प्रयासों की समीक्षा की गई। प्रयास और तेज किए जाएं क्योंकि यह मानवता से जुड़ा मामला है। फूट-फूट कर रोए बुजुर्ग दादा तो विधायक ने लगाया गले

विधायक के सामने दादा चरण सिंह बच्चों को याद कर फूट-फूट कर रोए। विधायक ने उन्हें गले लगा लिया। बुढ़ापे के अंतिम पड़ाव में पहुंचे 75 वर्षीय दादा चरण सिंह ने कहा कि पोता पोती उसके खिलौने थे। अंतिम इच्छा थी कि वह अपने इन खिलौनों के साथ कुछ दिन और खेलते, लेकिन उसकी यह इच्छा मन में ही अधूरी रह गई। कलयुगी बेटे ने अपने हाथों वंश मिटा लिया। उधर ग्रामीणों ने विधायक से मांग की कि आरोपितों को कड़ी सजा दी जाए। वहीं इस दौरान बच्चों की मां सदमे में गिर पड़ी, जिसे महिलाओं ने संभाला। दो बच्चों की तलाश अभी जारी

थाना कुंजपुरा प्रभारी मुनीष कुमार ने बताया कि फिलहाल एक बच्चे शिव का शव बरामद हुआ है। बाकी दो बच्चों की तलाश के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है, जिसमें एनडीआरएफ व गोताखोरों की टीमें लगी हैं।

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विधायक ने जागरण की भूमिका को सराहा

इस मामले में दैनिक जागरण की मुहिम की विधायक ने तारीफ की। उन्होंने कहा कि जागरण में छपे समाचारों से उन्हें महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिली। जागरण हमेशा मानवीय मुद्दों को प्राथमिकता से उजागर करता रहा है।

Edited By: Jagran