जागरण संवाददाता, करनाल : अतिरिक्त उपायुक्त अनीश यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को लघु सचिवालय में जिलास्तरीय समीक्षा समिति की तिमाही बैठक हुई। उसमें भारतीय रिजर्व बैंक के अग्रणी विकास अधिकारी मनु भारद्वाज, जिला अग्रणी प्रबंधक एसके सिघल, खादी एवं विकास उद्योग आयोग के अधिकारी, वित्तीय साक्षरता केंद्र के सलाहकार, आरसीटी के डायरेक्टर, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारी तथा बैंकों से आए प्रबंधकों ने भाग लिया। उन्होंने बैठक में अनुपस्थित रहे बैंक अधिकारियों के संबंध मे कहा कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।

अनीश यादव ने कहा कि वे सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर उनमें दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने पर बल दें, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति बैंकों से ऋण लेकर अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि अभी वित्तीय वर्ष की एक तिमाही बची है, जिन बैंकों ने अभी तक अपने लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं। वे इस पर फोकस रखें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि बैंक डिपोजिट पर ज्यादा ध्यान देते हैं और खर्च करने पर कम तवज्जो रहती है। यही नहीं बैंक छोटे ऋणियों की ऋण देने में अनदेखी करते हैं, जबकि करोड़ों के ऋण लेने वाले कई बार डिफाल्टर हो जाते हैं। गरीब व्यक्ति को नकारात्मक दृष्टि से न देखें, गरीब समय पर ऋण चुकाते हैं। अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करें।

बैठक में आरबीआइ के अग्रणी विकास अधिकारी मनु भारद्वाज ने बैंकर्स को कहा कि लोग अपनी जेब से पैसे खर्च कर परोपकार करते हैं, जबकि बैंकों को परोपकार करने के पैसे मिलते हैं, इसलिए सभी बैंक अधिकारी ईमानदारी से समाज और देशहित में काम करते हुए, ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाएं। इससे प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया का सपना साकार होगा।

जिला अग्रणी प्रबंधक एसके सिघल ने त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि दिसम्बर 2019 तक जिला में कुल 20201 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए, जो राष्ट्रीय लक्ष्य 60 प्रतिशत के फलस्वरूप 126 प्रतिशत है।

Posted By: Jagran

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