'किसानों का सेवक हूं, सम्मान पर आंच नहीं आने दूंगा...', करनाल में बोले शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करनाल के तरावड़ी से 'खेत बचाओ अभियान' का औपचारिक शुभारंभ किया, किसानों से संतुलित खाद उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

किसानों का सेवक हूं, खेती और किसान के सम्मान पर कभी आंच नहीं आने दूंगा- शिवराज सिंह चौहान।
HighLights
केंद्रीय मंत्री ने करनाल से 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ किया
किसानों से संतुलित खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह
सॉइल हेल्थ कार्ड उपयोग, देसी गोवंश संरक्षण पर जोर दिया
जागरण संवाददाता, करनाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करनाल जिले स्थित ऐतिहासिक तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित किसान चौपाल में केंद्रीय मंत्री चौहान ने अन्नदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि किसानों की सेवा ही उनके लिए ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है।
उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किसान और किसानी के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा उपस्थित रहे।

चौपाल की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे स्वयं को किसी ऊंचे पद पर आसीन नेता नहीं, बल्कि किसानों का सेवक और स्वयं एक समर्पित किसान मानते हैं।
यह पगड़ी किसान के मान और स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसे कभी झुकने नहीं दिया जाएगा। आज समय की मांग है कि हम आधुनिकता और परंपरा का ऐसा समन्वय बनाएं जिससे हमारी धरती भी बचे और किसान की जेब भी भरे।
देखा-देखी नहीं, स्वाइल हेल्थ कार्ड के आधार पर हो संतुलित खाद का उपयोग
संवाद के दौरान रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान किसी खाद का अंधाधुंध विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि उसके संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिना बीमारी के जिस तरह कैल्शियम की गोलियां खाने से शरीर को नुकसान होता है, उसी तरह बिना जरूरत के रासायनिक खाद झोंकने से धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है।
उन्होंने किसानों से अपील की, रामलाल ने चार कट्टे डाले तो श्यामलाल साढ़े चार कट्टे डाले- इस देखा-देखी की होड़ से बाहर निकलें। पहले स्वाइल हेल्थ कार्ड से मिट्टी की जांच कराएं और जितनी आवश्यकता हो, उतना ही संतुलित पोषण दें। इससे लागत भी घटेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।
प्राकृतिक खेती का आह्वान: कम से कम एक एकड़ से विधिपूर्वक करें शुरुआत

प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों की शंकाओं का समाधान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपने स्वयं के खेतों का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं अपने खेत में उतरते हैं, सब्जियां, फल और फसलें उगाते हैं और प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन तभी बेहतर मिलता है जब उसे वैज्ञानिक और सही विधि से किया जाए।
देसी गोवंश और लिंग-वर्गीकृत वीर्य तकनीक पर चर्चा
चौपाल में किसानों ने देसी गायों के संरक्षण, दुग्ध मूल्य और बछिया पैदा करने वाली उन्नत तकनीकों का विषय उठाया। इस पर वैज्ञानिकों की उपस्थिति में चर्चा करते हुए आश्वस्त किया गया कि सरकार ऐसी सस्ती व सुलभ तकनीक को तेजी से मान्य कर रही है, जिससे किसानों को वाजिब दरों पर यह सुविधा मिले।
साथ ही, देसी गाय के दूध के बेहतर बाजार मूल्य और प्राकृतिक खेती में गोमूत्र व गोबर की केंद्रीय भूमिका पर भी बल दिया गया। चौहान ने इस वर्ष हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में आई भारी गिरावट और किसानों की सजगता की दिल खोलकर सराहना की।
