संवाद सूत्र, निसिग : गांव बरास स्थित प्रगतिशील किसान सरदार गुरचरण सिंह के पूसा बासमती धान के बीज प्लांट पर कृषक सहभागिता बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत आइएआरआइ के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल से वैज्ञानिकों की टीम पहुंची। जिसमें कृषि वैज्ञानिक आरएन यादव, राकेश सेठ, डॉ. पंडिता व डॉ. चोपड़ा ने बीज प्लांट का निरीक्षण किया।

उन्होंने धान में आने वाली तेला सहित अन्य बीमारियों के लक्षणों की बारीकी से जांच की। ताकि फसल में तेला आने से बीज की पैदावार व गुणवत्ता प्रभावित ना हो। डॉ. पंडिता सिंह ने बताया कि दिन में अधिक गर्मी व नमी युक्त वातावरण में उत्पन्न तेला व तना छेदक कीट पौधों के तने को चूसकर सूखा देता है। जो अनुकूल मौसम में एक सप्ताह में सौ से दौ सौ गुणा अधिक अंडे देता है। जिसकी रोकथाम के लिए किसानों को सचेत रहते हुए फसल के प्रतिदिन निरीक्षण की जरूरत है। उन्होंने बीमारी के कारण, लक्षण व बचाव के तरीके बताए।

डॉ. राकेश सेठ ने बताया कि पूसा बासमती संस्थान का मुख्य उद्देश्य धान की रोग रोधी किस्मों को ईजाद कर केमिकल मुक्त फसलों की पैदावार से है। ताकि चावल निर्यात में भी परेशानी ना हो। उन्होंने धान की किस्म 1509 व पूसा 1121, 1718, 1509, पीआर 114, 126 व पूसा 44 का भी निरीक्षण किया। इस दौरान प्रगतिशील किसान गुरपेज सिंह व मनदीप सिंह ने वैज्ञानिकों से तेले कीट के प्रबंधन को लेकर जानकारी ली।

Posted By: Jagran

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