जागरण संवाददाता, करनाल: वसंत पंचमी पर पतंगबाजी का जुनून लोगों के सिर चढ़कर बोला। नीला आसमान सुबह होने के साथ ही रंग-बिरंगी पतंगों से सतरंगी हो गया। भांत-भांत की पतंगों ने हवा के साथ अठखेलियां की। नन्हें पतंगबाज से लेकर बुजुर्गों तक ने पतंगबाजी पर हाथ अजमाए। मौसम पतंगबाजी के अनुकूल था और हवा की गति भी पतंग उड़ाने के लिए लिहाज से मुफीद थी। ऐसे में लोगों ने दिल खोलकर पतंगें उड़ाई। पतंग काट देने पर आई बो वो काटा कहते हुए खूब चिल्लाए तो पतंग कट जाने पर तुरंत दूसरी पतंग की ओर हाथ बढ़ा दिया। डीजे की धुन पर नाचते हुए मनाया पतंग उत्सव

शहर में प्रत्येक मोहल्ले या गली के अंदर छतों पर डीजे रखवाए थे। वसंत पंचमी पर रविवार का अवकाश होने से पतंगबाजी का मजा दोगुना हो गया। लोगों ने अपनी अपनी छतों पर ही पूरा दिन बिताया। पतंगबाजी को खास बनाने के लिए डीजे लगवाए गए। युवा जमकर डीजे पर नाचे। नवाबों के जमाने से जुड़ा पतंगबाजी का अतीत

कर्ण नगरी में पतंगबाजी का दौर नवाबों के जमाने से जुड़ा है। नवाबों की पतंगबाजी के किस्से आज भी शहर में बुजुर्ग बताते हैं। वक्त के साथ ही शहर की पतंगबाजी मशहूर होती। पतंगबाजी का त्यौहार जयपुर व कानपुर में होने वाली पतंगबाजी को टक्कर देता है। पतंगों व चाइनीज डोर की हुई खूब बिक्री

पतंगबाजों की फरमाइश पूरी करने के लिए पतंगों से बाजार कई दिन पहले ही सज गए थे। खासकर कलंदरी गेट, जुंडला गेट व सदर बाजार सहित पुराने शहर की पतंग व डोरों की दुकानों पर लाखों रुपये का माल आ चुका है। इस बार भी बाजार में देसी डोर की बजाए चाइनीज डोर का बोलबाल रहा। प्रतिबंध के बावजूद यही डोर बिकी। देसी डोर के तहत आने वाले पंजाब के मांझे के गोले कहीं दिखाई नहीं दिए। इसके साथ ही देसी डोर के पुराने ब्रांड को कोई हाथ भी लगाने को तैयार नहीं था। चाइनीज डोर की वजह से पुराने पतंगबाजों ने पतंग उड़ाने से तौबा भी कर ली है।

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