जागरण संवाददाता, करनाल : मानसून 2020 की शुरुआत सकारात्मक यानि अच्छी बरसात के साथ हुई थी, लेकिन जुलाई माह में मानसून का प्रदर्शन कई जगहों पर कमजोर पड़ गया। जुलाई में कमजोर मानसून के बावजूद इस समय बरसात सामान्य से ऊपर है। उभरते ला नीना के चलते भारत का मुख्य बारिश का मौसम देश के ज्यादातर भागों के लिए सकारात्मक और अच्छा रहा है। कोई भी सामुद्रिक स्थिति मानसून के बेहतर प्रदर्शन और अच्छी बरसात की राह में बाधक नहीं रही। देश के चार प्रमुख क्षेत्रों में मध्य और दक्षिणी भागों पर सामान्य से काफी अधिक वर्षा हुई है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों में 34 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। इसके साथ उत्तर भारत में भी बारिश औसत से कम बनी हुई है। इन सबके बीच मानसून 2020 की विदाई सामान्य से अधिक वर्षा के साथ होने की संभावना है और आंकड़े 107 फीसद या उससे ऊपर भी रह सकते हैं। समय से पहले हुआ था मानसून का आगमन

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून का आगमन देश में सामान्य समय से पहले हुआ था। मानसून के पहले माह यानि जून में 18 फीसद अधिक वर्षा दर्ज की गई। लेकिन मानसून सीजन के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण महीने जुलाई में यह कमजोर रहा। जुलाई में बरसात में 10 फीसद की कमी देखने को मिली। गौरतलब है कि 4 महीनों के मानसून सीजन में जुलाई और अगस्त में सबसे ज्यादा वर्षा होती है। जून में 18 फीसद ज्यादा और जुलाई में 10 फीसदी कम के बीच जुलाई के आखिर में मानसून सामान्य पर था। अगस्त माह में मानसून में व्यापक सुधार हुआ। लेकिन सितंबर की शुरुआत सुस्त रही। सितंबर माह के पहले सप्ताह में देश में बरसात औसत से 30 फीसद कम वर्षा दर्ज की गई।

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