जागरण संवाददाता, करनाल:

सेना में रहकर बतौर कैप्टन देश की सेवा करने वाले रामसिंह ने जिंदगी में भी कष्ट झेले। शामगढ़ अपने घर में परिवार संग रह रहे राम सिंह भले ही 30 वर्ष पहले यमुनानगर चले गए, लेकिन आज भी उनकी यादें यहां ताजा है। अब भले ही वे दुनिया छोड़ गए हैं। गांव के लोग कहते रहे कि दस साल पहले मिलकर राम भाई लक्ष्मण को छोड़ गए। स्वास्थ्य विभाग से इलेक्ट्रिशियन के तौर पर सेवानिवृत्त राम सिंह के अनुज लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि भाई बीए तक की पढ़ाई के बाद सेना में क्लर्क भर्ती हुए। अंबाला से ही बतौर कैप्टन सेवानिवृत्त हुए। गांव से ही इकलौते बेटे प्रवीन की शादी की। टूटता रहा मुसीबतों का पहाड़

यही उनकी पत्नी की मौत भी हुई। इसके बाद वे यमुनानगर चले गए। यहां साल 2001 में बेटी पूनम की भी मौत हो गई। गांव की जमीन के मामले में उनसे मिलने के लिए राम सिंह उनके घर 2010 में आए थे इसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ, इसके चलते वर्तमान में उनकी हालात के बारे में भी उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। नौकरी जाने से बेटे दिमागी हालात बिगड़ी

उनकी मौत की खबर जानकर स्वजन और गांव का हर शख्स हैरान है तो छोटे भाई लक्ष्मण को भी यकीन नहीं हो रहा कि भाई की मौत ऐसे हालात में हुई। अर्से से उनका गांव से नाता नहीं रहा। गांव के लोगों की मानें तो पहले पत्नी प्रकाश की कैंसर के चलते हुई मौत और दिल्ली दूरदर्शन में इंजीनियर बेटे प्रवीन की नौकरी छूट जाने के साथ उसकी दिमागी स्थिति और लगातार बिगड़े परिवारिक हालात में वे परेशान रहने लगे थे। इसीलिए न भाई या उनके स्वजनों से उनका कोई संपर्क था और न ही अपने गांव से। बेटे को बमुश्किल संभालते थे पिता

लक्ष्मण सिंह के अनुसार राम सिंह भले ही करीब 30 साल पहले सेना से कैप्टन के तौर पर सेवानिवृत हो गए थे, लेकिन दिमागी तौर पर परेशान रहने वाले इकलौते बेटे प्रवीन को बुजुर्ग होने के बावजूद संभालते थे। उनके लिए खाना बनाते थे। हालांकि वे अंदर से टूट चुके थे, लेकिन चेहरे पर भाव नहीं आन दिए। न ही किसी से परेशानी साझा की। रामसिंह की अनुज लक्ष्मण से अंतिम मुलाकात दस वर्ष पहले हुई। जब वे जमीन बेचने आए थे। दोनों में शुरू से ही बहुत कम बातचीत होती थी।

Edited By: Jagran