जागरण संवाददाता, करनाल : लोक आस्था और सूर्य उपासना का पर्व छठ नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। इस अवसर पर पश्चिम यमुना नहर किनारे स्थित सूर्य मंदिर में श्रीराम कथा का आयोजन हुआ। गुरुवार को महिलाओं के गाए पारंपरिक गीतों वातावरण गूंजता रहा। शहर से ग्रामीण इलाकों तक लोक आस्था के पर्व छठ को लेकर उत्साह का माहौल है। इसे स्वच्छता का पर्व भी माना जाता है। इसमें साफ-सफाई का काफी ध्यान रखा जाता है। घाट की सफाई और पानी के बहाव के लिए छठ पर्व सेवा समिति मंडल के सदस्यों ने बैठक कर चर्चा की और नगर निगम कमिश्नर से मुलाकात कर सफाई की अपील की। सब्जी मंडी में छठ पर्व के लिए दुकानों पर खरीदारी में बढ़ोतरी हुई है। गीतों के साथ गेहूं पीसने में जुटी रहीं महिलाएं

पूर्वांचलवासियों के घरों में खासा उत्साह है। महिलाएं छठ मइया के पारंपरिक गीतों को गाते हुए प्रसाद के लिए गेहूं को धोने, पिसाने की तैयारी में जुट गई हैं। पहली नवंबर को खरना, दो नवंबर को अस्त होते सूर्य को पहला अ‌र्घ्य दिया जाएगा और तीन नवंबर को उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ महाव्रत का समापन होगा। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग 36 घंटे तक व्रत का पालन करना पड़ता है। दो नवंबर को शाम सूर्यदेव की पूजा के लिए पश्चिम यमुना नहर पर हजारों श्रद्धालु एकत्र होंगे। घर की सफाई, शुद्ध भोजन महापर्व की शुरुआत आज नहाय-खाय के विधान से शुरू हुई। सुबह घर की साफ-सफाई कर पवित्र किया। छठ व्रती सुबह स्नान करने के बाद पवित्र तरीके से कद्दू की सब्जी, चने की दाल और चावल का सेवन के साथ व्रत की शुरुआत की। छठ पर्व पर बाजार गुलजार, खरीदारी शुरू

दीपावली के बाद एक बार फिर बाजारों में रौनक बढ़ी है। पूजन सामग्री, फल और कपड़ों की दुकानों पर खरीदारी बढ़ी है। सब्जी मंडी में दुकानों पर बड़ी संख्या महिलाओं ने खरीदारी की। बाजार में गन्ने की आवक कम होने के बावजूद बृहस्पतिवार को अधिक बिक्री हुई। दुकानदार महेश कुमार के अनुसार छठ पर्व की खरीदारी के लिए ग्राहकों में बढ़ोतरी हुई है। अधिकतर लोग पैकेज वाली पूजन सामग्री को पसंद कर रहे हैं जोकि 1800 रुपये में सारा सामान होता है। फल, सब्जी और कपड़ों की दुकान पर भी बृहस्पतिवार को भीड़ दिखाई दी। कद्दू और गन्ने की मांग बढ़ी

छठ पर्व पर गन्ने और कद्दू की विशेष खरीदारी की जाती है, जिसके चलते इन दिनों दामों में इजाफा हुआ है। नारियल सामान्य 20-30 रुपये और जटा वाला नारियल 40-50 रुपये, सेब 60-80 रुपये किलो, कद्दू 30-45 रुपये प्रति किलो, गन्ना 15-20 रुपये प्रति पीस, सिघाड़ा 35-45 रुपये किलो, केला 60-80 रुपये दर्जन, अनार 120-140 रुपये किलो, सीताफल 70-85 रुपये किलो, बांस की डलिया 45-70 रुपये में खरीद की गई। नाशपाती, गाजर, नींबू, डली, सुपारी, सिंदूर, रोली, लाल रूई, गुड़, बताशा, मिट्टी के बर्तन, दिया, अदरक, कच्ची हल्दी की भी डिमांड में बढ़ोतरी हुई है। 1972 से करनाल में रहकर मना रहे पर्व

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जिला समस्तीपुर के ग्राम जना‌र्द्धनपुर के रहने वाले सलारघन राय ने बताया कि 1972 में आकर करनाल शहर में बसे थे और अशोक नगर में स्थायी निवासी हैं। रिटायर्ड सलारघन राय बताते हैं कि लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने के बाद छठे दिन छठ का पर्व पड़ा था। राम और सीता ने व्रत रखा था। ऐसी भी मान्यता है कि वन में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास के दौरान भी मां सीता छठ का व्रत रखती थीं। धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों में भी छठ पर्व की आस्था है। 47 वर्षों से करनाल में पूरे परिवार के साथ महाछठ पर्व को मना रहे हैं। घर की साफ-सफाई करवाने के साथ-साथ घाट की सफाई में भी योगदान किया जाता है। परिवार से मिली संस्कृति का कर रहे पालन

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कटिहार जिले के गांव नकीपुर से संबंध रखने वाले राजीव पुरम निवासी नागेंद्र मेहतो ने बताया कि परिवार सहित यहां वर्ष-1993 से बसे हैं और कारोबार भी स्थापित किया है। बुजुर्गों से मिली संस्कृति का पालन करते हुए प्रत्येक वर्ष इस पर्व को आस्था के साथ मना रहे हैं। इस संस्कृति की सीख बच्चों को भी दी जा रही है, जिससे कि परंपरा को आगे भी जारी रखा जा सके। चार दिन तक घर में पूजन का माहौल रहता है और घर को रंगबिरंगी लाइटों से भी सजाया जाता है। नहर की सफाई के लिए गंभीर नहीं दिखा प्रशासन

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सूर्य मंदिर के प्रधान सुरेश कुमार यादव ने बताया कि एक अक्टूबर को नगरनिगम और प्रशासनिक अधिकारियों को छठ के लिए साफ-सफाई और पानी के बहाव के लिए नगर निगम कमिश्नर निशांत कुमार यादव व मेयर रेणू बाला गुप्ता का रवैया सुस्त नजर आ रहा है। अभी तक किसी अधिकारी ने नहर का दौरा करना जरूरी नहीं समझा है। इस संबंध में निगम कमिश्नर से मुलाकात भी की गई, लेकिन सफाई को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। निगम कमिश्नर ने बताया कि दो ट्रैक्टर ट्रॉली और जेसीबी के साथ सात कर्मचारी साफ-सफाई के लिए तैनात कर दिए हैं।

Posted By: Jagran

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