मोती लाल, जलमाना

प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्म भरने के एक साल बाद पक्की छत का गरीब इंतजार कर रहे हैं। सरकार के नुमाइंदे तीन बार सर्वे और खस्ताहाल मकान की फोटो ले चुके हैं। मजदूर परिवार अपनी पक्की छत के लिए नेताओं व अधिकारियों के चक्कर भी लगा रहे हैं। वोट की राजनीति में किए गए दावे धरातल पर कोरे साबित हो रहे हैं। आवास की कई योजनाओं के संचालन के बाद भी मजदूरों की सुनवाई नहीं हो रही। कस्बे के 230 बीपीएल परिवार हैं जो खस्ताहाल छत के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। पक्का आवास न बन पाने से ऐसे परिवार घास फूस की झोंपड़ी में रह रहे हैं। अब ऑनलाइन फार्म भरने का आश्वासन देकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं।

फार्म जमा कराने के बाद से केवल आश्वासन

आवेदक सतपाल, संजय ने बताया कि एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए ग्राम सभा में अपना नाम लिखवाया था और इसके बाद फार्म भी भर कर दिए थे। तीन बार सर्वे और मकान के फोटो भी हो चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है। कई बार नेताओं व अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं हर बार यही आश्वासन मिलता है कि फार्म आनलाइन कर दिए गए हैं, जब ऊपर से ग्रांट आएगी तो जारी कर दी जाएगी। वोट की राजनीति में गरीब को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

बरसात में छोड़ना पड़ता है घर

बृजपाल, रामनिवास के अनुसार ग्रांट उपलब्ध करवाने में अधिकारी देरी कर रहे हैं। ऐसे में अगर तेज बारिश आती है तो खस्ताहाल छत में रहना मुश्किल है। अभी हालात ऐसे हैं कि बरसात होते ही कस्बे के सरकारी भवन की शरण लेनी पड़ती है। अधिकारियों के ग्रांट मुहैया कराने की स्थिति को साफ न कर पाने के कारण हालत चिताजनक होती जा रही है। दूसरी तरफ, बीपीएल श्रेणी की लिस्ट में भी लंबित है जिस बारे दोबारा सर्वे की गुहार लगाई है।

अभी तक जारी नहीं हई राशि

मुकेश, राजेश, संतोष, लीला राम ने बताया कि बीपीएल धारक होने के बावजूद मौजूदा पात्रता सूची में उनको पक्की छत के लिए ग्रांट मुहैया नहीं कराई गई है। पूर्व की योजनाओं में उनको लाभ नहीं मिला और प्रधानमंत्री आवास योजना में उनका नाम काफी नीचे होने से कब तक लाभ मिलेगा कहा नहीं जा सकता। अधिकारियों के सर्वे के बावजूद कुछ ग्रामीणों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं और कुछ को अभी तक राशि जारी नहीं की गई है।

मजदूरों की चिता वाजिफ

सरपंच सुरेंद्र कौर का कहना है कि 230 लोगों का नाम आवास योजना की श्रेणी में प्रमुख रूप से डाला हुआ है जिसका कई बार सर्वे भी हो चुका है कितु सर्वे को काफी दिन बीत जाने के बाद भी ग्रांट नहीं मिल सकी है। दिहाड़ी करने वाले मजदूर किसी तरह परिवार को पल रहे हैं और ऐसे में पक्की छत का सपनों पर पानी फिर रहा है।

वहीं, ग्राम सचिव प्रेम सिंह जागलान ने बताया कि आवेदकों की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करके सूची विभाग को भेजी जा चुकी है। सर्वे के दौरान पाए गए हालात चिताजनक है। राशि जारी करने की कार्रवाई उच्चाधिकारियों को करनी है।

Posted By: Jagran

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