जागरण संवाददाता, करनाल

मेयर पद की उम्मीदवार आशा वधवा पर नामांकन पत्र में 23 करोड़ 73 लाख रुपये की बैंक देनदारी छिपाने और गलत तथ्य देने का आरोप लगा है। उन्होंने नामांकन पत्र में चार करोड़ तीन लाख 56 हजार 485 रुपये की चल-अचल संपत्ति दिखाई और उनके पति मनोज वधवा की चल-अचल संपत्ति चार करोड़ 66 लाख 44 हजार 849 रुपये दर्शाई। देनदारी का जिक्र नहीं किया गया और न ही बताया गया कि बैंक ने उन्हें एनपीए घोषित किया हुआ है। चुनाव लड़ने योग्य नहीं आशा वधवा : शिकायतकर्ता

न्यू हाउ¨सग बोर्ड निवासी समाजसेवी नवीन कुमार ने डीसी और रिटर्निंग ऑफिसर को आशा वधवा का नामांकन रद करने की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार बैंक डिफाल्टर चुनाव नहीं लड़ सकते और वे किसी भी सूरत में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं ठहराए जा सकते। सब कुछ जानकारी में होने के बाद भी आशा वधवा ने अपने नामकांन के दौरान करोड़ों रुपये के बैंक डिफाल्टर होने की जानकारी छिपाई । इस बारे में बैंक समाचार पत्रों में डिमांड नोटिस भी जारी कर चुका है और स्पष्ट उल्लेख कर चुका है कि तय समय पर यदि राशि नहीं चुकाई गई तो सभी लोग डिफाल्टर माने जाएंगे, बावजूद इसके आशा वधवा ने तथ्य छिपा लिए। इंडियन ओवरसीज बैंक ने छपवाया था डिमांड नोटिस

नवीन कुमार ने कहा है कि 31 अगस्त 2018 को इंडियन ओवरसीज बैंक ने कई समाचार पत्रों में मांग डिमांड नोटिस छपाया था। उन्होंने कहा कि मैसर्ज जेएसएम प्रोटींस प्राइवेट लिमिटेड ने इंडियन ओवरसीज बैंक से करोड़ों रुपये लिए थे। बैंक बार-बार पैसे मांगता रहा, लेकिन लौटाए नहीं गए। अब मांग सूचना जारी कर 23 करोड़ 73 लाख 94 हजार 533 रुपए मांगे हैं। अब भी बैंक को रकम नहीं लौटाई गई। हालांकि बैंक अपने नोटिस में स्पष्ट कर चुका है कि दो माह में रकम नहीं लौटाई तो लोन लेने वाली कंपनी और उसके सभी गारंटरों को डिफाल्टर माना जाएगा। अब बैंक ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। नोटिस में है मनोज व आशा सहित परिवार के सदस्यों का नाम

मांग सूचना में लिखा है कि राधेश्याम वधवा पुत्र थाऊराम, मनोजकुमार पुत्र राधेश्याम वधवा, भारत वधवा पुत्र राधेश्याम वधवा, दयारानी पत्नी राधेश्याम वधवा, आशा रानी पत्नी मनोज कुमार, जेएमडीसिटी टेक प्राइवेट लिमिटेड और धीरज कुमार वधवा पुत्र रामलाल वधवा बैंक की ओर से दी गई राशि के गारंटर हैं। इनकी संपत्ति बैंक में गिरवी हैं। बैंक ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी करने की तारीख 31अगस्त 2018 के बाद हम आप सभी को सूचना प्रदान करते हैं कि यदि खाता निर्धारित समय के भीतर नियमित नहीं किया जाता या अदायगी नहीं की जाती और बैंक के वर्गीकरण के मामले में आरबीआइ के दिशानिर्देशों अनुसार विलफुल डिफाल्टर के रूप में वर्गीकृत होंगे। मामले में वह सब जो आप जानना चाहते हैं

बड़ा सवाल : क्या नामांकन रद्द हो सकता है

अभी नहीं। क्योंकि ऑब्जेक्शन लगाने में देरी हुई। यदि यही आरोप नामांकन के वक्त लगते तो जांच हो सकती थी। अब जबकि चुनाव निशान बंट गए हैं, ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं हो सकता। तो क्या दिक्कत आ सकती है

चुनाव के बाद क्या आशा वधवा को कानूनी दिक्कत आ सकती है। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक तब से कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है। यह कोर्ट पर निर्भर है कि इस अपील को स्वीकार करे या न करे। शिकायतकर्ता के पास अब ये रास्ता

एक ही रास्ता बचता है, वह इस मामले को लेकर सीधा राज्य चुनाव आयोग के पास पहुंचे, लेकिन वहां भी चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि इस अपील को माना जाए या नहीं। यदि राज्य चुनाव आयोग नामाकंन रद्द करता भी है तो आशा वधवा के पास इसके खिलाफ कोर्ट जाने का विकल्प खुला है। सियासी नुकसान हो सकता है आशा को

क्योंकि अब प्रतिद्वंद्वियों के पास आशा वधवा को घेरने के लिए एक मुद्दा मिल गया है। उन्होंने शनिवार से ही यह कहना शुरू कर दिया कि जो बैंक का डिफाल्टर है, उससे विकास की उम्मीद क्या की जा सकती है। अब क्योंकि मतदान में ज्यादा वक्त नहीं है, इसलिए यह मुद्दा आशा वधवा को भारी पड़ सकता है। राजनीति विशेषज और हरियाणा की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले डॉ. सुखपाल ¨सह ने बताया कि इस मुद्दे को उछालने का सीधा सा मतलब यहीं है कि मतदाता को भ्रमित कर उन्हें अपने पक्ष में डाइवर्ट किया जा सके। कानूनी विशेषज्ञों की राय

वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट जगमाल ¨सह ने कहा कि एनपीए घोषित करने के बाद यह जरूरी नहीं कि किसी उम्मीदवार का नामांकन रद कर दिया जाए। किसी को भी एनपीए घोषित किया जाता है तो उसे डिफाल्टर नहीं कानूनी तौर पर इस तरह के उम्मीदवार को अभी आयोग्य नहीं कहा जा सकता, लेकिन कानून विशेषज्ञ सुरजीत ¨सह ने कहा कि मामला फंस सकता है। क्योंकि बैंक डिफाल्टर तो उम्मीदवार नजर आ रहा है। फिर भी अभी क्योंकि मतदान में वक्त कम रह गया है। इसलिए शायद ही राज्य चुनाव आयोग कोई निर्णय ले पाए। वर्जन

आरओ कैप्टन शक्ति ¨सह ने कहा कि ऐसी शिकायत उनके पास आई है। लेकिन यह शिकायत नामांकन की छंटनी से पहले आती तो इस पर कार्रवाई होती हो। छंटनी के बाद अब वह इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।

Posted By: Jagran