जागरण संवाददाता, करनाल : डेंगू के नाम पर निजी अस्पतालों ने लूट मचा रखी है। इन अस्पतालों में कार्ड टेस्ट में पाजिटिव आने के बाद उसको दाखिल कर इलाज शुरू कर देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्त हिदायत यह दी गई है कि यदि कोई डेंगू का आशंकित मरीज है तो उसका एलाइजा टेस्ट भिजवाएं। इसकी जानकारी तुरंत प्रभाव से दी जाए। लेकिन कुछ निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग के इन आदेशों को दरकिनार कर मरीजों को लूटा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन की कोई परवाह नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में डेंगू के 30 केस सामने आ चुके हैं। डेंगू के बढ़ते मामलों ने लोगों चिता को बढ़ा दिया है। लेकिन हकीकत यह है कि डेंगू को ट्रेस करने में गंभीरता दिखाई जाए, ग्राउंड लेवल पर इसकी मानीटरिग की जाए तो केसों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिल सकता है। इस समय कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल, नागरिक अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी व निजी अस्पतालों में बेड फुल हैं। केसीजीएमसी में तीन हजार व नागरिक अस्पताल में दो हजार के पार हुई ओपीडी

वायरल बुखार व डेंगू तेजी से फैल रहा है। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में ओपीडी करीब तीन हजार तक पहुंच गई है। जबकि नागरिक अस्पताल में ओपीडी 2000 के पार हो गई है। निजी अस्पतालों में भी बेड फुल हैं। नागरिक अस्पताल में सभी वार्ड व इमरजेंसी में बेड भरे पड़े हुए हैं। इस समय डेंगू व वायरल बुखार के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। झोलाछाप भी खूब सक्रिय

जिले में कई जगहों पर झोलाछाप भी डेंगू का इलाज करने का दावा करने से नहीं चूक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इन झोलाछापों से इलाज करा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वह संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अपनी जांच कराएं और इलाज भी, लोग झोलाछाप डाक्टरों के संपर्क में ना आएं, इससे जान को जोखिम हो सकता है। प्लेटलेट्स गिरते ही जंबो पैक चढ़ाने का खौफ

मरीज की प्लेटलेट्स काउंट गिरते ही ब्लड का जंबो पैक चढ़ाने के लिए मरीजों को डराया जा रहा है। इससे ब्लड बैंक पर जंबो पैक के लिए भीड़ लगने लगी है। मरीज के ब्लड ग्रुप वाले परिजन के लिए फोन करने पड़ रहे हैं। ऐसे में मदद के लिए जीवनरक्षक लाइफ सेवर और प्रारंभ रक्तदाता के सदस्य जंबो पैक देने के लिए ब्लड बैंक पहुंच रहे हैं। क्या हैं कारण

मलेरिया, डेंगू या वायरल बुखार में प्लेटलेट्स कम होना आम बात है। लेकिन मरीज इससे तुरंत घबरा जाता है। संदिग्ध मरीज के सैंपल भेजने की जगह निजी लैब में जांच कराई जाती है। जहां पर एलाइजा टेस्ट करने की जगह कार्ड टेस्ट किया जाता है। जिसको अमान्य घोषित किया जाता है। क्योंकि इसके रिजल्ट सटीक नहीं होते हैं।

----------------- सिविल सर्जन डा. योगेश शर्मा ने कहा कि पिछले दिनों आइएमए के साथ भी डेंगू के मामलों को लेकर बैठक की थी। निजी अस्पतालों को सख्त हिदायत दी गई थी कि यदि कोई डेंगू का मरीज दाखिल करता है तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। एंटीजन के बाद एलाइजा के लिए भेजा जाएगा। यदि कार्ड टेस्ट से डेंगू कन्फर्म कर कोई अस्पताल मरीज को दाखिल कर रहा है तो उसको चेक कराया जाएगा। हमने पहले भी रिकार्ड चेक किया है, रूटीन चेकिग आगे भी जारी रखेंगे।

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