जागरण संवाददाता, करनाल

न्यायिक परिसर में इस वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। इसमें वाहन दुर्घटना, बैंक संबंधी, अपराधिक और बीमा कंपनी संबंधी, वैवाहिक और पारिवारिक मामले शामिल थे। इस दौरान जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव हितेश गर्ग ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 21 बेंच बनाए थे, जिनमें मोटर वाहन दुर्घटना के लिए इंश्योरेंस कंपनी से संबंधित सात बेंच शामिल थे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगदीप जैन ने बताया कि इस लोक अदालत में कुल 2774 मामले रखे गए। इनमें से 996 को मौके पर ही निपटा दिया। इस लोक अदालत में रखे मामलों से संबंधित कुल 4 करोड़ 87 लाख 40 हजार 818 रुपये की राशि कंपन्शेसन के रूप में अवार्ड की गई। इनमें मोटर वाहन के 26 केसों का निपटारा किया गया तथा चेक बाउंस के 187 केस निपटाए गए। लोक अदालत में वाहन दुघर्टना से संबंधित मामलों में 2 करोड 3 लाख 29 हजार रुपये की राशि कंपन्शेसन के रूप में अवार्ड की गई। चेक बाउंस के मामले में 3 करोड 29 लाख 30 हजार 628 रुपये की राशि के केसों को आपसी सहमति से निपटाया गया। लोक अदालत का मकसद न्याय प्रक्रिया में तेजी लाना है जिससे लोगों को सुलभ और सरल तरीके से न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत में निर्णय दोनों पक्षों की रजामंदी से किए जाते हैं। इसमें किसी प्रकार का कोई खर्च नहीं आता और संबंधित पक्षों की आपसी सहमति से हुए फैसलों के दृष्टिगत कहीं अपील-दलील नहीं होती।

इस लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि 10 वर्ष से भी ज्यादा समय से लंबित चले आ रहे करनाल के एक बहुचर्चित मामलों में पार्टियों का फैमिली कोर्ट के प्रधान जिला न्यायधीश अंशु शुक्ला की बेंच ने आपसी सहमति से समझौता करवाया।

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