विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हरियाणा: रसोई से महक गायब, प्याज-लहसुन और अदरक ने बढ़ाया जायके का खर्च; 200 रुपये तक पहुंचा भाव

Published: Sat, 29 Aug 2026 02:57 PM (GMT+05:30)

करनाल में प्याज, लहसुन और अदरक के दाम बढ़ने से रसोई का बजट और होटल-ढाबों का जायका महंगा हो गया है।

रसोई से महक गायब, प्याज-लहसुन-अदरक ने बढ़ाया जायके का खर्च (जागरण)

रसोई से महक गायब, प्याज-लहसुन-अदरक ने बढ़ाया जायके का खर्च (जागरण)


HighLights

  1. प्याज, लहसुन, अदरक के दाम में भारी उछाल।

  2. खुदरा में लहसुन 240 रुपये, प्याज 60 रुपये किलो।

  3. रसोई बजट और होटल-ढाबों की लागत बढ़ी।

जागरण संवाददाता, करनाल। रसोई में सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाले प्याज, लहसुन और अदरक के दाम बढ़ने से घर के बजट के साथ ही होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड का जायका भी महंगा पड़ने लगा है।

प्याज का थोक भाव इस समय करीब 45 से 50 रुपये किलो है, जबकि खुदरा में यह करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है। करीब 10-15 दिन पहले खुदरा प्याज 40 रुपये किलो के आसपास था।

अदरक थोक में करीब 100 रुपये और खुदरा में 120 से 140 रुपये किलो तक पहुंच गया है। लहसुन का थोक भाव 160 से 200 रुपये और खुदरा भाव 200 से 240 रुपये किलो तक है। करनाल सब्जी मंडी के थोक विक्रेता विवेक के अनुसार लहसुन में पिछले दिनों के मुकाबले स्पष्ट तेजी आई है।

तड़के का खर्च बढ़ा, रसोई में कटौती

प्याज-लहसुन के बिना अधिकांश सब्जियों, दाल और ग्रेवी का स्वाद अधूरा माना जाता है। ऐसे में इनके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू रसोई पर पड़ रहा है। गृहणियां अब खरीदारी में मात्रा का हिसाब लगाने लगी हैं। पहले जहां एक साथ अधिक मात्रा में प्याज और लहसुन खरीदा जाता था, वहीं अब जरूरत के हिसाब से खरीदारी की जा रही है।

गृहणी संतोष ने बताया कि रोजमर्रा की सब्जियों के साथ मसालों और अन्य सामान के दाम पहले ही बजट बिगाड़ रहे हैं। अब प्याज और लहसुन भी महंगे होने से महीने का हिसाब लगाना मुश्किल हो रहा है। गृहणी कनिका चोपड़ा ने कहा कि स्वाद से समझौता करना आसान नहीं है, इसलिए मात्रा कम करके काम चलाना पड़ रहा है।

ढाबे-रेस्तरां में लागत बढ़ी, स्ट्रीट फूड पर भी असर

प्याज, लहसुन और अदरक की खपत घरों के अलावा होटल, रेस्तरां और ढाबों में भी बड़े पैमाने पर होती है। ग्रेवी, छोले, चाप, मंचूरियन, चाइनीज व्यंजन और विभिन्न स्ट्रीट फूड में इनकी रोजाना खपत होती है।

कीमत बढ़ने से संचालकों की लागत बढ़ गई है। रेस्तरां संचालक बिल्लु ने बताया कि उनके सामने दो विकल्प हैं। या तो बढ़ी लागत खुद वहन करें या फिर खाने की कीमत बढ़ाएं। ग्राहक पहले ही कीमत को लेकर संवेदनशील हैं, इसलिए सीधे दाम बढ़ाना आसान नहीं है। ऐसे में बढ़ी लागत का असर मुनाफे पर पड़ रहा है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

बर्गर, चाट, मोमोज, छोले-कुलचे, नूडल्स और अन्य खाद्य पदार्थों में प्याज का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। कुछ दुकानदार मात्रा में कटौती कर रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहकों को पहले की तुलना में कम प्याज दे रहे हैं।

नतीजा यह कि प्याज-लहसुन-अदरक की तेजी ने सिर्फ रसोई का बजट नहीं बढ़ाया, बल्कि शहर के खानपान कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है। अगर तेजी आगे बनी रही तो इसका असर खाने की प्लेट की कीमत और ग्राहकों की जेब दोनों पर दिखाई दे सकता है।