फोटो---04 नंबर है। जागरण संवाददाता, करनाल

दयाल सिंह कॉलेज की एनएसएस यूनिट और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किसानों को जागरूक करने के लिए गांव सौंकड़ा, बांसा व प्योंत में किसानों को खेतों की पराली न जलाने के आह्वान के साथ- साथ ही तीनों गांवों में अलग- अलग जागरूकता रैली भी निकाली गई। एसडीएम आयुष सिन्हा ने पिछले दिनों करनाल जिले के सभी कालेजों की ड्यूटी लगाई थी कि एनएसएस से जुड़े स्वयंसेवकों को ले जाकर रेड जोन के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसानों को जागरूक करें। जागरूकता रैली निकालकर किसानों को प्रेरित करें कि वे पराली में आग न लगाएं। क्योंकि आग लगाने से खेतों की तो हानि होती ही है, साथ ही पर्यावरण भी बहुत दूषित होता है। इसी कारण लगातार प्रदूषण बढ़ने के कारण लोगों की सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है और नागरिक लगातार बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।

कालेज प्राचार्य डा. चंद्रशेखर भारद्वाज ने कहा कि आप दूसरे गांवों के किसानों को जागरूक करने के साथ- साथ अपने गांवों के किसानों को भी जागरूक करें। उन्हें समझाएं कि मशीन से कटाई के बाद पराली जलाने से केवल प्रदूषण ही नहीं होता बल्कि जमीन से नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर, पोटाशियम जैसे पोषक तत्वों और जमीन की उर्वरता का भी ह्रास होता है। इस कारण अगली फसल में और ज्यादा मात्रा में रासायनिक खादों का प्रयोग करना पड़ता है। गांव सौंकडा के सरपंच सरदार रणजीत सिंह विर्क ने आश्वस्त करते हुए बताया कि हमने पंचायत स्तर पर भी गांव के लोगों को पराली प्रबंधन के लिए लगातार जागरूक कर रहे हैं। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष कम किसानों ने पराली जलाई है। हमारा प्रयास अगली बार इससे ज्यादा रहेगा कि हम परिणाम शत प्रतिशत दें। उन्होंने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी किसान व नागरिक फसल अवशेषों को न जलाएं। नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फोन पर करें शिकायत

उन्होंने बताया कि अगर समझाने के बाद भी कोई किसान नहीं मानता तो उनकी शिकायत ग्राम सरपंच, नंबरदार, चौकीदार, पटवारी, ग्राम सचिव,एसडीओ या करनाल जिला प्रशासन को फोन नम्बर 0184-2254000 अथवा 9215767555 को शिकायत की जा सकती है जिस पर करनाल प्रशासन द्वारा तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Jagran