प्रदीप शर्मा, करनाल : अब जिला जेल में कैदियों को गोसेवा का अवसर मिलेगा। जेल प्रशासन के अधीन आने शुरू की गई गोशाला में करीब 500 गायों को रखने की व्यवस्था की जा रही है। इच्छुक कैदी या बंदी गोसेवा के लिए आगे आएंगे। यही नहीं जेल में बंद कैदियों व बंदियों के लिए यहीं से शुद्ध दूध व उससे बने उत्पाद मिल सकेंगे। इससे जेल प्रशासन को दूध व अन्य उत्पाद नहीं खरीदने पड़ेंगे और उन्हें शुद्ध दूध उससे निर्मित उत्पाद भी मिल सकेंगे।

गौरतलब है कि गोसेवा को लेकर जेल में कई कैदी गोसेवा के लिए अपनी इच्छा जता चुके हैं। इस प्रकार के गोसेवा के प्रति पैदा हो रहे उत्साह को देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से गोशाला बनाने का निर्णय लिया गया। करनाल जेल से पहला प्रयोग हो रहा है। करनाल जेल प्रशासन ने डीजीपी जेल को इस बाबत एक प्रस्ताव भी भेजा था, जिसको स्वीकार करते हुए इस दिशा में काम शुरू हो गया था। यह मॉडर्न गोशाला बनकर तैयार हो चुकी है। जिसका उद्घाटन किया जा चुका है। पांच एकड़ जमीन गोशाला के लिए

एडीजीपी डा. आरसी मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में यह बहुत अच्छी और बड़ी पहल है। जो कैदियों व बंदियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाएगी। जेल प्रशासन इसको चलाएगा। प्रयास सफल रहा तो अच्छी बात है, यदि दिक्कतें आई तो इसके संचालन के लिए कोई और भी विकल्प तलाशा जा सकता है। करनाल जेल प्रदेश की सबसे बड़ी और आधुनिक जेलों में शामिल है। यहां काफी जगह ऐसी है जो खाली है अथवा जहां खेती की जाती है। ऐसे में 5 एकड़ जमीन में गोशाला का निर्माण किया गया है। जेल के कैदी ही इसकी देखरेख करेंगे। जेल से बाहर जाने पर उनमें गो सेवा के प्रति भावना बढ़ेगी। मध्यप्रदेश में चल रहा प्रोजेक्ट

मध्यप्रदेश में ऐसा प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है। वहां कैदियों को रिहाई के समय मांगने पर गाय दी जाती है जो गो संरक्षण के प्रति एक अहम कदम है। एडीजीपी ने कहा कि गोशाला में दुधारू और बेसहारा दोनों तरह की गायों को रखा जाएगा। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया गया है। दूध के अलावा गो मूत्र और गोबर से गैस और गोमूत्र से अन्य उपयोगी सामान भी बनाए जाएंगे।

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