जागरण संवाददाता, करनाल : करीब 600 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपित कारोबारी नरेश बंसल की पुरानी कुंडली को खंगालने में पुलिस बेहद गंभीरता से जुटी है। उस पर दर्ज तमाम मुकदमों की जानकारी के अलावा पुलिस के पास पहुंची शिकायतें व विदेश जाने की तिथि से लेकर हालात को भी बारीकी से देखा जा रहा है। इकोनोमिक सेल की टीम जहां इसी सिलसिले में बुधवार को दिल्ली भी पहुंची तो वहीं पुलिस अब उसके भाई सुरेश जिदल को भी दुबई से लाने की तैयारी में जुटी है। आरोपित के खिलाफ अभी तक करनाल शहर थाने के अलावा जींद के पिल्लूखेड़ा, अलेवा व जुलाना व यमुनानगर के रादौर में दर्ज मामले भी सामने आ चुके हैं। आरोपित ने वर्ष 2016 में दुबई जाकर अपना कारोबार भी शुरू कर दिया, जिसके लिए पुराने कारोबारी रिश्तों का उन्हें फायदा मिला।

एसपी गंगा रामपूनिया के मुताबिक फिलहाल उनके भाई के अलावा दो लड़के भी दुबई में हैं। फिलहाल डीएफएससी की ओर से दर्ज कराए मामले में आरोपित के खिलाफ जांच की जा रही है तो वहीं बताया जा रहा है कि इसी मामले में उसकी ओर से सरेंडर किया गया है। बता दें कि आरोपित को सरेंडर करने के बाद 16 अक्टूबर तक रिमांड पर लिया गया था, जिसके पूरा होने पर उसे दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।

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अन्य स्थान की पुलिस ने नहीं किया संपर्क

एसपी गंगाराम पूनिया का कहना है कि फिलहाल इकोनोमिक सेल आरोपित नरेश सिगला के संबंधित मामले की जांच कर रहा है। अभी किसी भी दूसरे जिले व प्रदेश की पुलिस ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। आरोपित के खिलाफ दूसरे जिलों में भी दर्ज मामले सामने आए हैं। उसके आरोपित भाई सुरेश के बारे में भी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उसे भी कार्रवाई में शामिल किया जा सके।

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पीड़ित आढ़तियों ने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर उठाए सवाल

पीड़ित आढ़ती कृष्ण पाढा व रघुवीर का कहना है कि आरोपित नरेश सिगला द्वारा सरेंडर किया जाना योजना के तहत है। भले ही उसे रिमांड पर लिया हुआ है, लेकिन आज भी उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं है। उन्होंने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अलावा पीड़ित आढ़ती सड़कों पर उतरकर चिल्लाते रहे, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने ही उसे इतनी ढील दी कि वह दुबई फरार होने में सफल रहा। यहीं नहीं अपने परिवार को भी ले गया जबकि इसके बारे में पहले ही पुलिस अधिकारियों को अंदेशा जता दिया गया था। उन्होंने कहा पुलिस ने आरोपित के परिवार की एक आरोपित महिला के संबंध में दो माह तक चालान भी पेश नहीं किया था।

Edited By: Jagran