संवाद सूत्र, निसिग : चुनाव में वोट सबसे बड़ी शक्ति है। प्रत्याशी की हार-जीत का फैसला मतदाता की वोट पर निर्भर है। विधानसभा चुनाव में प्रत्येक मतदाता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। ऐसे जनप्रतिनिधि को अपना वोट देना चाहिए जो जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। लोगों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करे। सही तरीके से अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए लोगों के विश्वास पर खरा उतरे। सोच-समझकर करें नेता का चयन

वेद प्रकाश त्यागी के अनुसार कुछ नेता चुनावों में जीत हासिल करने के बाद क्षेत्र में दिखाई नहीं देते हैं। लोगों की समस्याओं के समाधान से भी कोई सरोकार नहीं रखते। ऐसे नेता के पक्ष में वोट नहीं डालना चाहिए। जनता के बीच में रहकर कार्य करने वाला और खुद को नेता नहीं, जनता का सेवक समझने वाले प्रत्याशी का चयन करना चाहिए। जनता के वादों पर खरा उतरे

शिक्षक विक्रम चौधरी के अनुसार चुनाव के समय में जनता से किए गए वादों पर खरा उतरने वाले नेता को वोट देना चाहिए, जिससे किक्षेत्र के विकास में कोई कमी न आए। चुनाव के समय जनता से सुहावने, लुभावने वादे कर वोट हासिल करने वाले और झूठे वादों की राजनीति करने वाले नेताओं का बहिष्कार करना चाहिए। जनता की पसंद का हो नेता

डॉ. सतवंत कौर मान के अनुसार लोगों के हकों का समर्थन करने वाला नेता का चयन करना जरूरी है। चुनाव के बाद जनता को अपनी समस्याओं के लिए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि सत्ता में आने के बावजूद नेता को जनता के बीच होना चाहिए। सही नेता ही आमजन की समस्याओं का हल करा सकता है। शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी

शिक्षक कृष्ण आर्य के अनुसार उनका जनप्रतिनिधि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक गांव में स्कूलों का निर्माण करवाए। क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए स्कूलों में सुविधाएं मुहैया करवाने वाला नेता बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है। भाईचारे को बढ़ावा दें

विनोद राणा गोंदर के अनुसार जातपात ऊपर उठकर आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने वाले नेता का चयन करना चाहिए। 36 बिरादरी के हितों को ध्यान में रखते हुए समान रूप से विकास कार्य करने वाले, जनता के साथ सुख-दुख साझा करने वाले, जिम्मेदारी का सही तरीके से पालन करने वाले नेता को वोट डालना चाहिए।

Posted By: Jagran

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