अमित सिंहमार, गढ़ी बीरबल

उत्तर प्रदेश में जमीन होने के कारण क्षेत्र के किसानों को धान की फसल बेचने में परेशानी हो रही है। ऑनलाइन प्रणाली के चलते जमीन की रजिस्ट्रेशन प्रदेश के पोर्टल पर न होने के कारण किसानों को कम दाम पर धान बेचना पड़ता है। किसानों का कहना है कि वर्षों से फसल और बिजाई को लेकर इधर-उधर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से समस्या का स्थाई हल नहीं निकाला जा रहा है। क्षेत्र के गांव चोगांवा, चंद्राव, गढ़पुर टापू, कलसोरा, जप्ती छपरा, नबियाबाद, सैय्यद छपरा, हलवाना, नागल, तातारपुर, कमाल पुर के गांव निवासियों की जमीन उत्तर प्रदेश में है। चंद्राव गांव का रकबा उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित हुआ है। चंद्राव गांव का लगभग 1019 एकड़ रकबा उत्तर प्रदेश में गया है। किसानों का मानना है कि जमीन को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं बावजूद समस्या ज्यों की त्यों बनी है। दोनों तरफ के किसानों में रहता है विवाद

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच लंबे समय से भूमि विवाद चला आ रहा है। किसानों को अपनी जमीन के अधिकार नहीं मील पा रहे हैं। इसके अलावा, कई किसानों की जमीन उत्तर प्रदेश में होने के बावजूद वहां रिकार्ड दर्ज नहीं हो पा रहा है। चंद्राव के ग्रामीणों ने बताया कि हम 45-50 साल से जमीन के लिए फिर रहे हैं हमें अब तक न जमीन मिली न जमीन के अधिकार जबकि उनका रिकार्ड उत्तर प्रदेश में चला गया। अभी तक उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा उनकी जमीन का रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया है।

बता दें कि सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा निर्धारित की गई थी। हरियाणा व उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच अपनी-अपनी जमीन को लेकर विवाद भी हुए। अगर किसी हरियाणा के किसान की भूमि उत्तर प्रदेश में गई है तो उसका राजस्व रिकार्ड उत्तर प्रदेश में दर्ज है और मालिक हरियाणा का ही रहेगा। ऐसा ही उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ हुआ और जमीन का रिकार्ड हरियाणा में दर्ज किया हुआ है। समस्या के समाधान को भटक रहे किसान

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ग्रामीण राजेन्द्र कुमार ने बताया है कि पहले पूरा रिकार्ड न जाने के कारण जमीन दर्ज नहीं हो पाई जब पूरा रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश प्रशासन के पास भेज दिया तो अभी तक अधिकारियों द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। उनकी 1019 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश की सीमा में है। इसमें से कुछ चंद्राव के ग्रामीण खेती कर रहे हैं बाकी उत्तर प्रदेश के लोग काम चला रहे हैं। फसल बेचने में हर वर्ष होती परेशानी

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ग्रामीण गुरदयाल सिंह ने बताया कि हम अपनी जमीन की समस्या को लेकर कई बार उत्तर प्रदेश के अधिकारियों बातचीत की, लेकिन हल नहीं निकला है। परिवार की जिम्मेदारियों में से समय निकाल कर सहारनपुर जाकर अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर साल आने-आने में पैसे खर्च होने से आर्थिक बोझ पड़ता है। ऑनलाइन फसल बेचने में परेशानी

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मदन लाल ने बताया कि जमीन का रिकार्ड न उत्तर प्रदेश में दर्ज है न ही हरियाणा में। अब सरकार द्वारा पोर्टल के माध्यम से फसल की खरीद की जाती है और फसल बेचने में परेशानी होती है। खुले में फसल के दाम नहीं मिलते हैं। फसल को यहां की मंडी में लाने तक ट्रांसपोर्टेशन में खर्चा होता है बावजूद फसल की कीमत भी वसूल नहीं होती है।

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