हरियाणा: ओलंपियन अनीश भनवाला के पते पर दर्ज मिले 4 फर्जी वोटर, 30 साल पहले के किरायेदारों के ID कार्ड पर उठे सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता जगपाल भनवाला ने ओलंपियन अनीश भनवाला के घर के पते पर 30 साल पहले के किरायेदारों के वोटर ...और पढ़ें

हरियाणा: ओलंपियन अनीश भनवाला के पते पर दर्ज मिले 4 फर्जी वोटर (जागरण फोटो)
HighLights
ओलंपियन अनीश भनवाला के घर के पते पर वोटर कार्ड
30 साल पहले किराये पर रहे लोगों के नाम दर्ज
शिकायतकर्ता जगपाल भनवाला ने सत्यापन पर उठाए सवाल
जागरण संवाददाता, करनाल। ओलंपियन निशानेबाज अनीश भनवाला के सेक्टर-6 स्थित मकान नंबर 659 के पते पर चार लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने के मामले में अब शिकायतकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जगपाल भनवाला ने पूरे मामले में भौतिक सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि संबंधित पक्ष ने उन्हें बताया कि वह लोग करीब 1995-96 के आसपास कुछ समय के लिए उनके मकान में किराये पर रहकर गए थे। इसके करीब 30 साल बाद उनके मकान के पते पर वोटर और पहचान संबंधी दस्तावेज बनना गंभीर सवाल खड़े करता है।
जगपाल भनवाला ने बताया कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित लोगों से उनकी बातचीत भी हुई। उन्होंने उनसे कहा कि यदि अब उनका मकान और निवास किसी दूसरी जगह है तो उन्हें अपने सभी दस्तावेजों में पता बदलवा लेना चाहिए। वह किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं चाहते, लेकिन अपने मकान के पते का गलत इस्तेमाल भी नहीं होने देना चाहते।
एक पते पर बन रहे कई दस्तावेज चिंता का विषय
आज के समय में आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज कई अन्य प्रक्रियाओं में भी उपयोग होते हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति के गलत पते पर पहचान संबंधी दस्तावेज बनना गंभीर विषय है। पुलिस इस मामले में दस्तावेजों की जांच कर रही है और वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
उन्होंने बीएलओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने से पहले संबंधित व्यक्ति की मौके पर भौतिक मौजूदगी और पते का सत्यापन होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उस पते पर रहता ही नहीं है तो बीएलओ को मौके पर जाकर इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
पुलिस जांच पर भरोसा, कार्रवाई के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
जगपाल भनवाला ने बताया कि पुलिस से उनकी बातचीत हो रही है और संबंधित लोगों से भी पुलिस स्तर पर जानकारी ली जा रही है। वह चाहते हैं कि पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके बाद यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
