हरियाणा: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से करनाल बेहाल, 55 फीडर ब्रेकडाउन; पानी को तरसे लोग
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से करनाल में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जहां 55 फीडर खराब होने से 5000 से ...और पढ़ें

हरयाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी (फाइल फोटो)
HighLights
बिजली हड़ताल से करनाल में 55 फीडर हुए ब्रेकडाउन
पांच हजार से अधिक शिकायतें, पेयजल आपूर्ति प्रभावित
रातभर अंधेरा, दिन में भी बिजली गुल, जनजीवन अस्त-व्यस्त
जागरण संवाददाता, करनाल। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब शहर से लेकर गांवों तक दिखाई देने लगा है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों की दिनचर्या पटरी से उतर गई।
कहीं रातभर अंधेरा छाया रहा तो कहीं दिन निकलने के बाद भी बिजली नहीं आई। बिजली के अभाव में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों को पानी के लिए भी परेशान होना पड़ा। दोपहर 12 बजे तक बिजली निगम के पास पांच हजार से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी थीं, जबकि 55 फीडर ब्रेकडाउन होने की जानकारी सामने आई।
हालात यह रहे कि बजीदा जाटान, श्यामनगर, रामनगर, प्रेमनगर और शिव कालोनी सहित कई क्षेत्रों में लोगों को रात के अंधेरे के बाद दिन में भी बिजली संकट से जूझना पड़ा। हड़ताल के कारण मरम्मत और शिकायतों के समाधान में देरी होने की आशंका ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।
रातभर अंधेरा, सुबह भी राहत नहीं
बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों में दिखाई दिया, जहां रात के समय बिजली गुल होने के बाद सुबह तक बहाल नहीं हो सकी। बजीदा जाटान, श्यामनगर, रामनगर, प्रेमनगर और शिव कालोनी में लोगों को रात में ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा। सुबह बिजली आने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को दिन में भी राहत नहीं मिली।
बिजली के बिना घरों में पानी की मोटर नहीं चल सकी और टंकियां भरने में दिक्कत आई। जिन घरों में पहले से पानी जमा नहीं था, वहां दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया। बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी, नौकरीपेशा लोगों के काम पर जाने और घरों में खाना बनाने जैसे जरूरी काम भी प्रभावित हुए।
पांच हजार शिकायतें, बजती रही फोन की घंटियां
बिजली संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोपहर 12 बजे तक पांच हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। वहीं, 55 फीडर ब्रेकडाउन होने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
सामान्य परिस्थितियों में फाल्ट आने पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर आपूर्ति बहाल करने का प्रयास करती हैं, लेकिन हड़ताल के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता और मरम्मत कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ऐसे में एक स्थान पर आया फाल्ट ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। लगातार शिकायतें बढ़ने से प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करना भी चुनौती बन जाता है। हालांकि, प्रत्येक फीडर के ब्रेकडाउन की अवधि और प्रभावित उपभोक्ताओं की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
पानी से लेकर कारोबार तक पर असर
बिजली संकट का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहा। पेयजल आपूर्ति के लिए ट्यूबवेल और मोटर पर निर्भर इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई। घरों में इन्वर्टर की बैटरी जवाब देने लगी तो मोबाइल फोन चार्ज करने और जरूरी इलेक्ट्रानिक उपकरण चलाने में भी परेशानी हुई।
दुकानों, छोटे कारोबारियों, वर्कशॉप और बिजली से चलने वाली मशीनों पर निर्भर प्रतिष्ठानों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। आनलाइन काम करने वाले लोगों और विद्यार्थियों को भी इंटरनेट, कंप्यूटर तथा अन्य उपकरणों के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जिन घरों में बुजुर्ग, छोटे बच्चे या नियमित बिजली से चलने वाले चिकित्सा उपकरणों पर निर्भर लोग हैं, उनके लिए लंबा बिजली कट अधिक परेशानी पैदा कर सकता है।
हड़ताल लंबी चली तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचने पर लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फीडरों में खराबी, ट्रांसफार्मर संबंधी शिकायतों और बिजली की लाइनों में फाल्ट आने पर समय पर मरम्मत नहीं हुई तो आपूर्ति बहाल होने में देरी हो सकती है।
पेयजल व्यवस्था पर असर गहराने के साथ अस्पतालों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य जरूरी सेवाओं के संचालन में भी बाधाएं पैदा होने की आशंका रहेगी। हालांकि, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं की वास्तविक स्थिति की पुष्टि अलग से जरूरी है।
बिजली बहाल करना निगम के लिए बड़ी चुनौती
फिलहाल लोगों की नजर बिजली आपूर्ति बहाल होने और शिकायतों के समाधान पर टिकी है। पांच हजार से अधिक शिकायतें और 55 फीडर ब्रेकडाउन व्यवस्था पर बढ़े दबाव की तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बिजली बहाल करना और लोगों को राहत देना है।
