जागरण संवाददाता, करनाल : डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक की रिपोर्ट के अनुसार जिले में फसलों के अवशेष जलाने से संबंधी आगजनी की घटनाओं में 70 फीसद कमी पाई गई है। वर्ष 2019-20 में अभी तक आगजनी की 827 घटनाओं की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी, जबकि इसकी तुलना में इस वर्ष में यह संख्या 251 है। विभाग द्वारा सभी घटनाओं को चयनित करके कार्यवाही शुरू कर दी गई है। दोषी किसानों के खिलाफ जुर्माने के साथ एफआइआर दर्ज करवाई गई है। उन्होंने बताया कि जिला में गेहूं की फसल की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध है। प्रशासन की फाने जलाने वालों पर कड़ी नजर है, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कृषि अधिकारियों की टीम द्वारा कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। डीसी ने बताया कि गेहूं की फसल की कटाई कंबाइन मशीन करवाने के पश्चात इसके अवशेषों को जलाने से होने वाले प्रदूषण से मनुष्य के स्वास्थ्य, संपत्ति की हानि, तनाव, क्रोध तथा मानव जीवन को भारी खतरे की सम्भावना रहती है। इन अवशेषों को जलाने से पर्यावरण में क्षति, जमीन में पोषक तत्वों की क्षति, किसान मित्र जीवों की क्षति तथा जनमानस के स्वास्थ्य पर धुएं से दुष्प्रभाव पड़ता है।

Posted By: Jagran

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