जागरण संवाददाता करनाल : फरवरी माह में हुए आटा घोटाले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। आरोपों के घेरे में आए चारो इंस्पेक्टर व तत्कालीन डीएफएससी बुधवार को एसीएस एसएन राय के सामने पेश हुए। उन्हें अपनी बात रखने का अंतिम मौका दिया गया। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट बना कर चीफ सेक्रेटरी को भेज दी जाएगी। इसके बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी। यह मामला दैनिक जागरण ने उठाया था। इसमें पात्रों को आटा दिया भी नहीं गया था, जबकि साफ्टवेयर में इसे अपलोड कर दिया गया था। मामला खुलने के बाद कई स्तर पर जांच हुई। लेकिन यह मामला खासा हाईप्रोफाइल रहा, इसके चलते हर जगह जांच प्रभावित होती चली गई। जांच के मामले को भी जागरण ने उठाया, इसके बाद निदेशालय ने इस पर सख्त नोटिस लिया। एसीएस ने स्वयं जांच शुरू की।

4 जुलाई को पकड़े आटे में कुछ डिपो होल्डर के नाम निकाले जाने का आरोप

इधर फरवरी में आटा घोटाले के बाद भी खाद्य आपूर्ति विभाग ने इसे रोकने की दिशा में कोई खास प्रयास नहीं किया। इसका परिणाम यह निकला कि गरीबों को दिया जाने वाला आटा एक निजी गोदाम में मिला। इस मामले में पुलिस ने विजय नाम के व्यक्ति को आरोपित बनाया है। इधर आरोप लगाया जा रहा है कि मामले में कुछ डिपो होल्डर के नाम निकाल दिए गए हैं। जबकि उन्होंने भी आटा विजय को बेचा था। दूसरी ओर दो ठेकेदार जो कि खाद्य आपूर्ति विभाग से सीधे तौर पर इस मामले से जुड़े हुए हैं, उन्हें भी अभी तक पुलिस की जांच टीम और खाद्य आपूर्ति विभाग की टीम ने जांच के दायरे में शामिल नहीं किया है।

हर स्तर पर करेंगे जांच : अनिल कुमार

इधर डीएफएससी अनिल कुमार ने बताया कि हर स्तर पर जांच की जाएगी। पुलिस की जांच में जो कुछ भी सामने आएगा, उसी के आधार पर विभाग अपने लेवल पर जांच करेगा। अब उपभोक्ताओं से भी पूछा जाएगा कि किस किस को राशन मिला। यह डाटा जुटाने के बाद आगे की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से पूरी तरह से भ्रष्टाचार को दूर किया जाएगा। इसके लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे उठाएंगे जाएंगे।

Posted By: Jagran

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