जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के मुख्य पंडाल में रविवार की शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध सूफी गायक सतिद्र सरताज ने गीत साईं वे साईं साडी फरियाद तेरे ताईं.. से प्रस्तुति शुरू की तो पूरा पंडाल गायक के साथ ही झूमने लगा। इसके बाद सतिद्र ने सानू प्यार दी चढि़यां खुमारियां, मेरे पैर न जमीन ते लगदे.., तुम्हें दिल्लगी भूल जाने पड़ेगी.. गीत गाए तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। इतना नहीं मेरी हीरिये, मेरी हीरिये तेरी खूशबूं नशीली मर जानीये., सच्जन राजी हो जवे बाबुला वे रोला नई पाईदा .. गाया तो महोत्सव की शाम ही रंगीन हो गई। इन प्रस्तुतियों पर झूमते पंडाल ने साबित कर दिया कि सतिद्र ही सरताज हैं।

इस सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया। उन्होंने कहा कि विश्व को गीता का संदेश देने में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव अपनी सार्थक भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार की तरफ से पिछले चार सालों से लगातार इस महोत्सव को बड़े से बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। अगले वर्ष आस्ट्रेलिया और कनाडा में गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता के कर्म के सिद्धांत को राजनेताओं को भी अपने कर्म की पद्धति में अपनाना चाहिए। मनुष्य निर्माण में हर किसी व्यक्ति को गीता के सार का अनुसरण करना चाहिए। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि मनुष्य को कर्म के सिद्धांत पर चलते हुए अपना कार्य करना चाहिए, फल की चिता नही करनी चाहिए। नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने कहा कि हरियाणा की भूमि से पूरे विश्व का पवित्र ग्रंथ गीता के माध्यम से बहुत बड़ा संदेश दिया गया है जो मनुष्य को जीने की राह दिखाता है और इस ग्रंथ में तमाम समस्याओं का समाधान निहित है।

इस सांस्कृतिक संध्या में लोग सायं पांच बजे से सूफी गायक सतिंद्र सरताज को सुनने के लिए मुख्य पंडाल में टकटकी लगाकर बैठे रहे। जैसे ही गायक मंच पर पहुंचे तो हजारों दर्शकों ने खड़े होकर अभिवादन किया और दर्शकों को शोर तब तक बंद नहीं हुआ, जब तक उन्होंने गाना शुरू नहीं किया।

Posted By: Jagran

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