जागरण संवाददाता, करनाल : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 12वीं के नतीजों की तरह 10वीं में भी लड़कियों ने बाजी मारी है। जिले में 19673 बच्चों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 9892 उत्तीर्ण हुए। 854 की रिअपीयर और 8927 छात्र-छात्राएं पास होने से रह गए हैं। इंद्री, घरौंडा, तरावड़ी, बीजना, चोचड़ा, असंध, इंद्री, कुटेल, निगदू के बच्चों ने बढ़त बनाई है। जिले के सभी 21 टॉपर इस बार ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।

इस बार कुल रिजल्ट का पास फीसद 50.28 रहा। दूसरी तरफ प्राइवेट 387 परीक्षार्थियों में में 279 उत्तीर्ण और 87 बच्चों की कंपार्टमेंट आई, जबकि 8 बच्चे फेल हो गए। पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल पांच फीसद परिणाम में बढ़ोतरी हुई।

पिछले वर्ष से हुआ सुधार

वर्ष 2018 में जिले का पास प्रतिशत 44.99 प्रतिशत रहा जबकि वर्ष 2017 में 41.35 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे। करनाल का प्रदेश में वर्ष 2017 में 18वां व वर्ष 2018 में 17वें स्थान पर आया था। वर्ष 2018 में लड़कियों का पास प्रतिशत 48.88 और वर्ष 2017 में 46.33 प्रतिशत था। इसी तरह, वर्ष 2018 में लड़कों का पास 41.46 प्रतिशत और 2017 में 37.05 प्रतिशत रहा था। वर्ष 2018 कुल 19575 बच्चों ने परीक्षा दी, जिसमें से केवल 8807 विद्यार्थी पास हो पाए, 719 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट और 10050 विद्यार्थी फेल हुए थे।

साइंस को नहीं समझा सका विभाग

सरकारी स्कूलों के रिजल्ट में पिछले वर्ष के मुकाबले पांच फीसद बेहतर परिणाम हासिल किया है, लेकिन मैथ के बजाय बच्चे साइंस को सही तरीके नहीं समझ सके हैं। परिजनों के अनुसार बच्चों के लिए स्कूल में साइंस के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इस बार मैथ में 84.44 प्रतिशत और साइंस में 66.51 फीसद परिणाम रहा। पिछले वर्ष 2018 में कक्षा दसवीं के रेगुलर विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में मैथ व हिदी के मुकाबले परीक्षार्थी विज्ञान में पीछे रहे थे। हिदी में 83.53 प्रतिशत, मैथ में 67.78 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे। इसके मुकाबले में साइंस में 65.64 प्रतिशत, सामाजिक विज्ञान में 63.84 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इसी तरह, प्राइवेट परीक्षार्थियों ने परीक्षा परिणाम में रेगुलर विद्यार्थियों को पछाड़ा था। प्राइवेट 566 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 381 विद्यार्थी पास हो पाए हैं। प्राइवेट का पास प्रतिशत 67.31 रहा था। इसके मुकाबले में रेगुलर 19576 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 8807 विद्यार्थी ही पास हुए थे।

बोर्ड के रिजल्ट की पास प्रतिशत बढ़ी

शिक्षकों के रिक्त पदों के बावजूद बच्चों ने सीबीएसई के बराबरी में लाने का प्रयास किया है। पिछले तीन साल के आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों में पास फीसद की बढ़ोतरी हुई है। शिक्षकों के प्रयास, सक्षम परीक्षा, डोर-टू-डोर प्रयास से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी बेहतर अंक ला रहे हैं। रिजल्ट को बेहतर करने के लिए हरियाणा बोर्ड की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में दसवीं और बारहवीं के जो छात्र किसी भी विषय में कमजोर हैं तो उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त कक्षाएं देने और पिछले सालों के प्रश्न-पत्रों से तैयारी कराने के निर्देश दिए हैं। स्किल पासबुक भी इसका विशेष उदाहरण है। ---वर्जन----

बच्चों के बेहतर परिणाम के लिए बच्चों की मेहनत सराहनीय है। स्कूल मुखियाओं ने अच्छे परिणाम के लिए पूरा वर्ष एक्स्ट्रा क्लासेस भी लगाई। आरटीई को सही से लागू करने के लिए सक्षम की परीक्षाएं भी ली जा रही हैं, ताकि सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम और सुधारे जा सकें।

राजपाल चौधरी, डीईईओ, करनाल

Posted By: Jagran

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